Friday, 22 May 2015

‘‘भगवान उसे ठीक कर दो मेरी बच्ची को किस बात की सजा मिल रही है’’

     सदियों से लेकर आज तक महिलाए हमारे समाज में पुरुष के पताड़ना का शिकार हो रही है कुछ तो उसकी पताड़ना से भाग्यवश बच जाती है कुछ तो उनके इस अत्याचार की कीमत अपनी जान गवा कर देती है।
            मेरा नाम हंसराज कोल है मेरी उम्र 50 वर्ष है मेरे पिता स्व0 सुखराम है मेरे तीन लड़के और दो लड़किया है। मै अशिक्षित हूँ बीड़ी कारखाने में मजदूरी करता हूँ। मै ग्राम- उभारी, पोस्ट-वलापुर, थाना-घुरपुर, ब्लाक-चाका, तहसील-करछना, जिला-इलाहाबाद का निवासी हूँ।
            अपनी गरीबी में किसी तरह दो लड़के और दो लड़कियो की शादी की थी। दोनो लड़किया अपने घर खुश रहेगी। लेकिन हम गरीब लोगो की जिन्दगी में खुशी कहा है। छोटी बेटी सोना की शादी अपने हैसियत से ज्यादा जो कुछ भी था। मै किसी तरह कर्ज लेकर लोहगरा-निवासी बच्चा लाल कोल के लड़के सुबाष से 30 मई, 2011 को किया। शादी के कुछ दिनों तक ठीक रहा उसके बाद से मेरी लड़की को उसके ससुराल वालो नें मारना-पिटना शुरू कर दिया। उससे यह भी कहा जाने लगा कि अपने पिता जी से पैसा लाओं मेरी गरीबी को देखकर वह मुझे कुछ भी नहीं बताती। उसकी माँ होती तो शायद वह उन्हे यह सब बात को बताती। धीरे-धीरे वह उनकी मार और ताने सहते-सहते बीमार हो गयी। हमारे घर कुछ दिनों के लिए आती और फिर चली जाती। मैं भी दिन भर मजदूरी कर शाम को आता तो उसे चुप देखता मै उससे बोलने की कोशिश करता तो वह कुछ ज्यादा नहीं बोलती थी। मै उस समय सोचा कि शादय उसकी बात करने का मन नहीं कर रहा होगा।
            उसके ससुराल से उसके ससुर, सास जब आते तो वह तुरन्त जाने के लिए तैयार हो जाती भले ही उसकी तबीयत ठीक हो या न हो। मै नहीं जानता था कि वह उनकी मार के डर से तैयार हो जाती है। नही तो मै उसे नहीं जाने देता। हर बार की तरह इस मई, 2013 में उसके ससुर और सास लेकर आये सास चैराहे पर ही थी और ससुर उसे घर लेकर आये उस समय मैं घर पर नहीं थी। शाम को जब आया तब उसकी हालत देखा वह बिल्कुल चुप थी। उसकी तबीयत ठीक नहीं लग रही थी। मै दो तीन बार बोला सोना सब ठीक है तब वह नहीं बोली उस समय मै यही सोचकर चुप हो गया। सुबह बात करूगा। सुबह होते ही मैने आवाज दी वह उठ नहीं रही थी। उसके चेहरे से लग रहा था कि वह बीमार है। तभी बड़ी बेटी निर्मला ने कहा उसके ससुर यह कहकर पहुंचा कर गये कि यह बीमार है बहुत झड़वाये व फूकवाये लेकिन सही हुई एक ओझा को भी दिखाये वह ढाई हजार रुपये मांग रहा है। हमारे पास इतना पैसा नहीं है कि इलाज करवाये। यह सुनकर मै सन्य हो गया। मेरी छोटी बेटी नहा धोकर खाना बनाकर उसे खाना दिया उसने थोडा बहुत खाया और छोड़ दिया। मैं गरीब आदमी किस तरह उसका दवा करवाये यही सब सोचता रहता इधर-उधर दिखाकर छोटे डाक्टर से दर्द की दवा कराने लगा और मजार पर दिखने लगा। 

       एक दिन बीतने के बाद मै उसको नहलाने लगा तो देखा उसके पीठ पर सरिये से निशान पड़ा हुआ था वह देखकर मैं धबडा गया और बोला सोनवा यह कैसा निशान पड़ा हुआ था। वह कुछ नहीं बोल रही थी। उसके आँख में से आँसू निकल रहे थे। बहुत कहने के बाद यह बोली सब लोग मुझे सरिया से मारे है। यह सुनकर मै आग बबूला हो गया, और रोने लगा कि कितना निर्दयी से मेरी बेटी को मारे है। उसका आदमी अपने साथ किसी लड़की का फोटो खिचाकर दूसरी शादी करने की बात कर रहा था। यह सब जब घर वालो ने मुझे बताया तब मुझे कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि इसी कारण ये लोग उसे मार रहे है जिससे वह पागल हो जाये या मर जाये तो दूसरी शादी कर ले। यह सब बाते सुनकर मेरा मन दुःखी हो गया। धीरे-धीरे उसकी हालत बद से बत्तर होने लगी ससुराल का एक आदमी 6-7 महीना हो गया कोई देखने नहीं आया और न ही फोन से भी कभी खबर नहीं ली। यह एकदम चुप रहने लगी। खाना खाना भी छोड़ दिया विस्तर पर टट्टी व पेशाब करने लगी। जब हम लोग नहलाते तो हमे मारती और अपने बदन को नोचती व कपड़ा फाड़ने लगी। यह सब देख-देखकर मुझे बहुत तकलीफ हो रहा था। मैं रोता और उसे समझाता विट्टी काहे अपने आप को सजा दे रही हो। वह उस समय पागल की तरह मेरे तरफ आँख बनाकर देखती उसकी यह हालत देखकर मै रोने लगता कि आज उसकी माँ होती तो शायद वह बात करके उसके मन के दुःख को समझा पाती। मेरी फुल सी बच्चीं की क्या हालत उन लोगो कर दी है। इसी चिन्ता में रात भर जागता रहात था। अपने से ही अपने बदन पर सीने पर कई जगह घाव कर दिया था। बहुत मना करते तो वह हमें नोचने मारने लगती थी। दिन-रात उसी की चिन्ता लगी रहती थी कि भगवान उसे ठीक कर दे। भगवान हमारे बच्ची को किस बात की सजा दे रहा है। तभी एक संस्था मानवाधिकार जननिगरानी समिति वाराणसी के कार्यकताओं की मदद से मेरी लड़की को डा00 के0 टण्डन के पास ले जाया गया। दो महीने से उन्ही की दवा से बहुत आराम मिला है। अब उसकी स्थिति में काफी सुधार हुआ है। वह अपने से टट्टी व पेशाब करने लगी और नहाने भी लगी। खाना भी खाने लगी है। अब कुछ बात करो तो बोलती भी हैं यह सब देखकर मेरा मन बहुत खुश होता है। लगता कि पहले कि तरह मेरी बेटी फिर हो जायेगी।
            मै चाहता हूँ कि उसके ससुराल वालो ने मेरी बेटी के साथ जो भी उसे शारीरिक एवं मानसिक प्रताड़ना देकर उसे पालग किया है। उन लोगो के खिलाफ सख्त से सख्त कार्यवाही हो। मेरी बेटी को पालग कर उसकी कोई खबर भी नहीं ले रहे है। इससे साफ-साफ पता चल रहा है कि वह इसे मारकर पागल कर दूसरा शादी कराना चाहते है। मै गरीब बाप हूँ। उसके ससुराल वाले सामने आकर अपनी गलती स्वीकार कर मेरी बेटी को इज्जत और सम्मान से रखगे तभी मै उसे विदा करूगा। ससुराल जाने के बाद उसे कोई भी शारीरिक एवं मानसिक पताड़ना न दे और उसकी जरूरत को पूरा कर उसका ध्यान दे।

साक्षात्कारकर्ता - फरहत शबा खान्                                           
संघर्षरत पीडि़त -  हंसराज कोल