Thursday, 7 May 2015

सब विभाग के कर्मचारियों ने ली मेरे पति की जान!

      मेरा नाम चमेली देवी उम्र-40 वर्ष पत्नी-स्व0 लल्लू राम उर्फ शंकर (एस0पी00) स्पेशल पुलिस आफिसर पता ग्राम-धुआस, पोस्ट-अमलौधा, थाना-धोरावल, जिला-सोनभद्र की निवासी है। मेरे पति थाना-धोरावल में स्पेशल पुलिस आफिसर (एस0पी00) के पद पर नियुक्त थे। मेरे पाँच सन्तान है। 1. राजेश कुमार भारतीय उम्र-25 वर्ष, जिसकी शादी हो चुकी है। 2. बृजेश कुमार भारतीय उम्र-23 वर्ष, 3. रीना उम्र-20 वर्ष जो कक्षा-12 वी की छात्रा है। 4. रामकृष्ण उम्र-17 वर्ष जो कक्षा-9 का छात्र है। 5. राम ललित उम्र-15 वर्ष जो कक्षा-8 का छात्र है। हम सभी परिवार एक साथ खुशी से रहते है। 
दिनांक 28 जनवरी, 2014 को धुआस कालोनी में जन चौपाल (स्वास्थ्य शिविर) लगा हुआ था। जिसमें जिले के सभी सरकारी आला अधिकारी जैसे-जिलाधिकारी (सोनभद्र), मुख्य चिकित्सधिकारी, मुख्य विकासधिकारी जिला-विकासधिकारी, सीपीओ, आरओ, खण्ड विकासधिकारी बीएसऐ पुलिस विभाग के आलाधिकारी समाज कल्याण विभाग, इत्यादि अन्य विभाग के अधिकारी मौजूद थे। जिससे मेरे पति स्व0 लल्लू राम उर्फ शंकर का ड्यूटी भी उसी चौपाल में लगा हुआ था। मेरे पति को उसी दिन हल्की बुखार और हरारत मससुस हो रहा था तो उसी कैम्प से सरकारी डाक्टर द्वारा जाँच कराकर दवा लिये और उसी दवा को खाते ही मेरे पति का अचानक स्वास्थ्य अत्यधिक खराब होने लगा। क्योंकि मेरे पति को जो दवा दिया गया था उस दवा की तिथि खत्म हो चुकी थी। उसी कैम्प की गाड़ी (एम्बूलेंस) से मुख्य चिकित्साधिकारी के आदेश पर मेरे पति को सामुदाकिय स्वास्थ्य केन्द्र घोरावल भेजने के लिए कहा। रास्ते में ही मेरे पति को उल्टी शुरु हो गयी। जो अस्पताल पहुँचने से पहले ही मेरे पति की मृत्यु घोरावल बाजार में हो गयी। तब मैं और मेरा बेटा अपने पति की लाश के साथ एम्बूलेंस से ही सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, घोरावल पहूँची तो वहाँ के डाक्टर ने मेरे पति को मृत घोषित कर दिया। मेरे आँखों के सामने मेरे पति की मृत्यु हो गयी और मैं कुछ ना कर सकी। उस समय मैं एक दम से पत्थर की मूर्ति सी बन गयी कि अब मेरा और मेरे बच्चों का क्या होगा क्योंकि घर में कमाने वाले सिर्फ मेरे पति ही थे। सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र घोरावल के सरकारी डाक्टर ने थाना-घोरावल की पुलिस को सूचना दिया। तब पुलिस आयी और वही एक्सपायेरी डेट की दवा देखी जिसको खाते ही मेरे पति की मृत्यु हो गयी थी। देखी और चली गयी। सी0एम00 शिविर कैम्प का डाक्टर ने पुलिस वालों से मिलकर मेरे पति का पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी गलत-गलत बनवाया। क्योंकि हम गरीब, असहाय, बेवस, अशिक्षा विहिन जाति की चमार थी। इसके लिए मैं अपने बेटे राजेश के साथ जिलाधिकारी मुख्य चिकित्साधिकारी के पास गयी और बोली कि साहब मेरे पति का पी0एम0 रिपोर्ट गलत है। तब उन दोनों आलाधिकारी ने कहा कि तुम्हारे पति की मृत्यु हार्ट अटैक के आने से हुयी है ना कि दवा के खाने से ! तब मैं और मेरा बेटा थाना-घोरावल पर सही रिपोर्ट बनवाने के बारे में गये तो वहाँ के दरोगा ने हमें और बेटे को माँ-बहन की भद्दी-भद्दी गाली जाति सूचक गाली देने लगा और बोला कि साली माधर चोद आयी हो रिपोर्ट बनवाने जब जिलाधिकारी और सी0एस00 साहब ने बोल दिया कि मृत्यु हार्ट अटैक से हुयी है तो क्यों नही मान रही हो। यहाँ से जल्दी भाग जाओ नही तो मैं तुम दोनो (माँ-बेटे) को जेल में बन्द कराकर जिन्दगी खराब कर दुगाँ।
तब मुझे और मेरे बेटे को लगा कि इसमें सभी अधिकारी मिले हुए ही क्योंकि उसी कैम्प की दवा (एक्पायेरी) खाने से ही झरहवा टोला के फागू लाल  उम्र-60 वर्ष, छागुर कनौजिया  उम्र-65 वर्ष, रीता, अनिता, कवर वंशी ने भी उसी दवा का सेवन किया था तो उन सभी लोगों को भी उल्टी शुरु हो गयी थी। तब डाक्टरों ने सभी लोगों का इलाज किये और वो सभी लोग ठीक हो गये।
मुख्य चिकित्साधिकारी और डाक्टर के कहने पर मेरे पति का गलत रिपोर्ट बनाया गया क्योंकि पोस्टमार्टम रिपोर्ट इसलिए गलत बनवाया कि वही सी0एम00 और डाक्टर फस ना जाये। मेरे पति की मृत्यु दिनांक 28 जनवरी, 2014 के दिन शाम लगभग 4:00 बजे हुयी और पोस्टमार्टम रिपोर्ट दिनांक 29 जनवरी, 2014 की सुबह 10:30 बजे पर बनी थी।  हमारे परिवार में केवल हमारे पति ही कमाने वाले थे जिससे घर का खर्च चलता था। उनके न रहने से मेरे घर की आर्थिक स्थिति अत्यधिक खराब हो गयी है। हम लोग दाने-दाने के लिए मोहताज हो गयी हूँ कि अब भीख मांगने की नौबत घर में आय गयी है। इस कारण हमलोगों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए हम लोगों को अब सरकारी कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाये साथ ही ड्यूटी पर तैनात होने के अवज में बच्चों को नौकरी तथा पुनर्वासन राशि भी दिलाया जाये। जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति सृदृढ़ हो सके और समाज में अपने बच्चों के साथ रह सकू।
       हम चाहते है कि उन दोषियों के साथ क़ानूनी करवारी हो और हमे न्याय मिले और मेरे बेटे को नौकरी जिससे हमारे घर की आर्थिक स्थिति सुधर सके|
हम अपनी बात को बताकर हल्लापन महशूस कर रहा है|

साक्षात्कारकर्ता – पिंटू गुप्ता

संघर्षरत पीडिता- चमेली देवी