Wednesday, 3 June 2015

‘‘अभी एक गम को भूला ही नही पायी थी कि दूसरी मुसीबत ने तो तोड़कर मुझे रख दिया’’

हमारे भारतवर्ष में इस समय बेरोगारी और भूखमरी इस कदर पाव पसार चुकी है कि हर नौजवान अपने परिवार को दो वक्त की रोटी के लिए हर समय अपनी जिन्दगी को दाव पर लगाकर उसके आगाष में समाता जा रहा है। ऐसे ही एक परिवार जिसको ऐसे ही नौजवान को दो वक्त की रोटी के इन्जाम में खुद अपनी जान गवानी पड़ी उसी को विधवा की कहानी उसी की जुवानी से सुने।
मेरा नाम पूजा देवी है मेरी उम्र 28 वर्ष है। मेरे पति स्व0 अवधेश पटेल है। मै ग्राम-बाबूपुर,पोस्ट-दादुपुर,थाना-धुरपुर, ब्लाक-चाका, तहसील-करछना, जिला-इलाहाबाद का मूल निवासी हूँ। मैं अशिक्षित हूँ। आज से 13 वर्ष पूर्व पहले मेरा विवाह अवधेश पटेल से हुआ था मेरे तीन बच्चे थे। जिसमें से अभी आठ दिन पहले 20 नवम्बर, 2013 को मेरी आठ महीने की बच्ची खुशी के पेट में थोड़ी सी तकलीफ हुई थी तभी वह इतनी बढ़ गयी कि उसे हम लोग चिल्लर अस्पताल इलाहाबाद ले गये वह तेज-तेज रो रही थी। दर्द से कराह रही थी। जब हम उसे वहा ले गये तो पता चला कि उसे निमोनिया हो गया है, अस्पताल वालो ने जवाब दे दिया और वह उसी वक्त उसकी मृत्यु हो गयी। अभी एक गम को भूला नहीं पायी थी कि दुसरी मुसीबत ने तो मुझे तोड़कर रख दिया पबत की मौत के गम को भूल नहीं पायी थी कि बेटी भी छोड़कर चली गयी।
            3 अगस्त, 2013 को तो मेरी दुनिया ही उजड़ गयी। रोज की तरह उस दिन भी सुबह मै खाना बनाकर घर के कामो में लगी थी उन्हे खाना दिया उनकी तबीयत कुछ ठीक नहीं थी उनका काम पर जाने का मन नहीं था वह बिजली का काम करते थे। जब भी बिजली विभाग में कही काम होता था तब वह लोग इन्हें बुला ले जाते थे, यह प्राईवेट काम करते थे। उस दिन भी करीब 10:00 बजे राजेन्द्र प्राईवेट मिस्त्री का फोन आया बोले रामआसरे (सरकारी बिजली कर्मी) बुला रहे है, उस समय उनका जाने का मन नहीं था। वह बोले मै आज नहीं आ रहा हूँ तब वह लोग चौकठा परेड पर थोड़ा काम है करके चले जाना। यह सुनकर वह तैयार हो गये। मै बोली जब मन नहीं है तब क्यों जा रहे है बोले अभी आ आऊॅगी यही कहकर चले गये। वहा जाने के बाद चौकठा का काम खत्म करने के बाद सारेगोपुर में खम्भे पर चढ़े थे। राजेन्द्र बोला ईट बाधकर उतरना तभी ईट बाधॅते-बाधॅते लाईट आ गयी पावर इतना ज्यादा था कि तुरन्त उन्हे जलाकर उनका खूर चुसकर इन्हें छोड़ दिया। 
       उनके जाने के बाद मै घर के कामो में फिर से लग गयी। शाम के 5:00 बजे मेरे जेठ के फोन पर फोन आया कि इन्हे करेन्ट मार दिया यह सुनकर वह उनके पास गये। उस समय मुझे नहीं मालूम था कि उनकी हालत बहुत खराब हैं मै सोची थोड़ी कही तार जोड़ रहे होगे। करेन्ट लगा होगा। कुछ देर बीत जाने के बाद जब कोई खबर नहीं मिली तो मेरा मन घबराने लगा। कोई उस समय मुझे कुछ भी नहीं बता रहा था जैसे-जैसे समय बीत रहा था। मेरा मन घबराता उस समय घर में सभी औरते ही थी किसके साथ उनको देखने जाऊ फोन लगाकर पूछती तो कहते सब ठीक है, वह ठीक हो जायेगे। लेकिन अन्दर से इतनी घबराहट हो रही थी कि न कुछ खाते का मन करता न ही सोने का रात भर रोती बिलखती रही जब भी आँख बन्द करने की कोशिश करती तो जैसे लगता सब कुछ सामने अधेरा सा छा गया। अभी बेहोश हो जाऊॅगी। आँख से तेज आँसू निकलने लगा घर में चारो तरफ कोहराम मच गया लोग रोने विलखने लगे। बच्चे भी घिघियाकर रोने लगे बस उस समय यही लग रहा था कि यह क्या हो गया लोग मुझे सभाल रहे थे। यह सब हमें ढाढ़स दे रहे थे। लेकिन उस समय मुझे यही लग रहा था कि सब कुछ खत्म हो गया सब यही सोचती, वह नहीं गये होते तो आज उनके साथ यह नहीं होता।
            शाम को 5:00 बजे पोस्टमार्टम के बाद उनकी मिट्टी आयी उस समय जैसे लग रहा था यह क्या हो गया। मैं दौड़कर उन्हें देखने गयी उनका पूरा बदन बुरी तरह से जल गया था सिर्फ चेहरा ही बचा था। ऐसे लग रहा था कि भगवान ने हमे उनकी आखिरी दर्शन कि लिए उनके चेहरे को सही सलामत रखा था। वह उनको आखिरी बार देखने भी नहीं आये। कुछ देर बाद उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। मेरा सब कुछ खत्म हो गया। उस दिन उनका काम पर जाने का एकदम मन नहीं था। लेकिन उन लोगों ने उन्हें बुलाकर उन्हें मौत के मुंह में ढकेला। रामआसरे सरकारी कर्मचारी है और राजेन्द्र छोटे लाल प्राईवेट है। जब यह लोग जान रहे थे कि यह खम्भा पर चढे़ है तो यह लोग क्यो नहीं लाईन को कटवाये क्यों लाईन को चालू रखे है। उनका तो कुछ नहीं बिगड़ा मेरा तो सब खत्म हो गया। बच्चों के सिर से बाप का साया हट गया। अभी तेरही बीती थी कि कुछ दिन बाद आठ महीने की खुशी भी चली गयी इस समय जैसे मेरे परिवार पर गमो का पहाड़ टुट गया है। दो बच्चे है शिखा 7 वर्ष की और कुन्दन सिंह पटेल ढेड़ वर्ष का उन सब की परवरीश अकेले कैसे करू कुछ समय में नहीं आ रहा है। उनकी पढ़ाई-लिखाई कैसे करू। मेरा सब कुछ खत्म हो गया। मै चाहॅती हूँ कि सरकारी कर्मचारियों के ऊपर केस हो और न्याय मिले।
            मै अपनी कहानी को बताकर मेरे मन हल्कापन महसूस हुआ।

साक्षात्कारकर्ता - फरहद शबा खानम्                             
संघर्षरत पीड़िता - पूजा देवी