Tuesday, 9 June 2015

‘‘विश्वास दिला कर किया विश्वासघात’’

          मेरा नाम ममता कोल, उम्र-25 वर्ष है।  मैं गाहुर गाँव, जिला-चित्रकुट, थाना-बरगड़ की रहने वाली हूँ। मेरे पति का नाम शिवपदन, उम्र-28 वर्ष है। मेरी एक बेटी, उम्र-पाँच साल की है।
            घटना छः वर्ष पुरानी है। हमारे गाँव के एक लड़के ने हमें लालच देकर प्यार के चंगुल में फँसा कर मुझसे प्रेम किया और कहा कि मैं तुमसे शादी करूँगा। मेरे घर वह रोज आता था। जब मैं घर में अकेली रहती थी, वह मेरे पास बैठकर प्यार की बाते किया करता था। मैनें उस पर धीरे-धीरे विश्वास करना शुरू कर दिया। वह मिस्त्रीगिरी का काम करता था। जब शाम को घर आता था तो मुझे मिलने के लिए बैचेन रहता था। जब मैं उससे मिलती तो वह बार-बार यही कहता था, मैं तुझे सोना-चाँदी, कपडे़ सब कुछ दुँगा और तुझसे शादी भी करूँगा। फिर एक दिन वह मेरे घर आया घर में कोई नहीं था, माँ-बापू गिट्टी फोड़ने गये हुये थे। उसने मेरे साथ मेरे घर आ कर जबरजस्ती शारीरिक सम्बंध बनाया। उस दिन मैं रोती रही और वह मुझसे कहकर गया था कि तुम इस बात को किसी से मत बोलना, मैं तुमसे शादी करूँगा। मैं चूप रही मैनें किसी से नहीं बताया और जब मेरे पेट में उसका बच्चा आ गया, तो जब मैने उससे कहा कि मैं तुम्हारे बच्चे की माँ बनने वाली हूँ तो वह गाँव से कूछ दिनों के लिए बाहर भाग गया। उसके कुछ दिनों बाद मैंने माता-पिता को बताया। उस समय मैं बहुत रोई, मुझें बहुत बुरा लग रहा था। 
       गाँव वाले बुरी-बुरी बातें बोलने लगे। मैनें उस लड़के से कहा की अब तुम मुझसे शादी करो, नहीं तो गाँव वाले हम पर थुकेगें। तब शिववदन ने कहाँ, मैं तुमसे शादी नहीं कर सकता, क्योकि जब मैने तुम्हारे साथ शारीरिक सम्बध बनाया, तुझे बराबर पैसा देता रहा और तुम इस बच्चे को मार डालों। उस समय मैं बहुत रो रही थी और परेशान थी कि क्या करूँ, क्या न करूँ। जिसने मेरे साथ प्यार का नाटक करके, मुझसे गलत सम्बंध बनाया और जब इसका बच्चा मेरे पेट में आया तब वह मुझसे शादी करने से मना कर रहा है।
            कुछ दिन बाद मेरे पिता ने उसके पिता से हाथ जोड़कर माफी मांगी कि आप के बेटे ने मेरी लड़की के साथ गलत किया है। गाँव वालों के सामने मेरी इज्जत दाव पर लगी है। लेकिन उसका पिता नहीं माना। फिर हमने बड़गड़ थाने जाकर रिर्पोट लिखाई और वहाँ दरोगा साहब तथा गाँव प्रधान ने मेरी गाँव वालों के सामने शादी करवाई। शादी के तीन माह बाद जब हमारी बेटी हुई, उसके तीन दिन बाद मेरी सास व ससुर तथा पति तीनों नें मिलकर हमको घर से बाहर निकाल दिया और रोड पर खचोर-खचोर कर हमें मारा। हमारे पुरे शरीर में दर्द और पीठ से खुन भी निकल रहा था।
            उस समय हमें ऐसा लग रहा था कि आत्महत्या कर ले, लेकिन किसी तरह मैं अपने आपको संभालती रही कि इंसान का जन्म एक बार मिलता है। मैं मर जाऊँगी तो मेरी बेटी को कौन संभालेगा। मैं अपने पिता के घर जाकर रहने लगी। वहा भी माँ-बाप की बुरी-बुरी बाते सुननी पड़ी। हम अपने ससुराल कुछ दिन बाद गये तो ससुर ने मुझे कुल्हाड़ी लेकर दौड़ाया और मुझे  फिर मारकर घर से बाहर निकाल दिया, हम रोते रहे, गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन उन्होने मेरी एक बात न मानी। हमे खाना भी नहीं देते थे, दो-दो दिनो तक भूखे रखा करते थे, कहते कुतईया को खाना न दो, अपने आप घर छोड़कर चल जायेगी। फिर भी हम उनके अत्याचार सहते रहे। मेरी बच्ची के खाने तक को भी कुछ नही देते। मैं उसे पत्थर तोड़कर मजदुरी करके खिलाती-पिलाती हूँ।
            आज से एक वर्ष पहले उसने अब दुसरी शादी भी कर ली। कभी-कभी मैं गाँव से बाहर जाती हूँ और वह मुझे मिल जाता तो मुझे बुरी-बुरी गाली देता है और कहता है कि तु क्या कर लेगी मैं दुसरी मेहर ले आया हूँ, तु इसी तरह गली-गली भटकेगी।
            हमने पत्रकारिता में अपनी मुकदमा दायर किया, हमारे पास मुकदमा लड़ने के लिए पैसे नही थे, फिर भी मैं मजदुरी करके उसके खिलाफ केस दायर किया कि वो मुझे और मेरी बच्ची को कम से कम खर्च तो देगा। मुकदमा अभी भी चल रहा है, हमेशा सोच-सोचकर परेशान रहती हूँ। सोचती हूँ मेरी जिन्दगी इस कमीने ने बर्बाद की है, साथ में मेरी बच्ची को भी भुगतना पढ़ रहा हैं। मैं इसको कैसे पालूँगी तथा कैसे इसके जीवन को सुख दूँगी। यह सोचकर मैं हमेशा परेशान रहती हूँ, सर में दर्द रहता है, शरीर बेचैन रहता हैं। कभी मैं जब काम करने जाती हूँ तो वहाँ बैठकर रोती रहती हूँ। वह जब कभी मुझे गाँव में मिल जाता है, तो मुझे लगने लगता है कि मैं इसे कैसे मारूँ।
            मेरे माँ-बाप भी मेरा सहयोग नहीं कर रहे है। यह सब बाते सोच-सोचकर हमेशा परेशान रहती हूँ। कभी-कभी नींद से भी जाग जाती हूँ। माँ-बाप भी टार्चर करते और कहते कि जैसा तुने किया है अब तूही भुगत। आपको अपनी दुःख भरी कहानी सुनाकर मुझे बहुत अच्छा लग रहा हैं। मुझे आशा है कि उस दुष्ट से न्याय मिलेगा।

साक्षात्कारकर्ता -रीता चौरसिया

संघर्षरत पीड़िता-ममता कोल