Monday, 27 April 2015

मेरे पति के हत्यारों ने कहा पुलिस प्रशासन को जेब में रखता हूँ!

         मै सुनीता मसोमात उम्र 34 वर्ष पति स्व0 कैलाश यादव ग्राम-घरवरियाबर] पोस्ट-बेहराडीह] थाना-डोमचांच, जिला-कोडरमा] झारखण्ड की मूल निवासी हूँ।
मेरी घटना यह है कि मेरे पति लकडी मिल में काम करते थे और जो कमाई होता था, उसी से मेरा घर चलता था। इसी तरह समय बीत रहा था। मेरे पति सीधे-साधे इन्सान थे और पूरे परिवार व घर का खर्च चला रहे थे। इसी तरह समय के साथ-साथ मैं तीन बच्चों की माँ बन गयी। मेरे पास दो लड़का एक लड़की है। मेरी बेटी का शादी हो गया और पिछल एक साल से मेरे पति कैलाश यादव ग्राम केलपुर] थाना-धनवार में आरा मील में लकडी का काम कर रहे थे। वहा लकडी का मिल है] वो लोग सारा काम रात को ही करवाता है क्यों कि वो आरा मिल अवैध रुप से चलाते थे। इस बात की जानकारी मेरे पति को नहीं थी। मेरे पति को यह कह कर काम पर लगवाये कि रोज का मजदूरी तुमको 400 रुपये देगें। लेकिन वो आधा पैसा देते थे। आधा पैसा रख लेते थे कि बाद में ले लेना और जब भी मेरे पति पैसा मागते तो टाल मटोल कर देते थे। मेरे पति रक्षाबंधन में घर आये थे और दिनांक 12 अगस्त] 2014 को वापस काम पर चले गये।
दिनांक 13 अगस्त] 2014 को वो रात काम कर रहे थे तभी उन पर मोटा व बडा लकडी गिर गया। इस बात की जानकारी हमलोगों को तब मिला जब दिनांक 14 अगस्त] 2014 को वो मेरे पति को एक आटो में एक आदमी के साथ गम्भीर अवस्था में दिन के 12%00 बजे भेज दिया। उस समय बहुत जोर से बारिश हो रही थी। हमलोग जब उनको अचानक ऐसी हालत में देखे उन्होने हमको सारी बात बताई हमने कहा कि वो इलाज क्यों नही करवाये, तो उन्होनें कहा कि घर इस लिए भेज दिया कि ज्यादा चोट है कुछ आराम कर लेना वो हमसे और कुछ कहना चाह रहे थे पर कह नहीं पा रहे थे, हम तुरन्त ग्लूकोज मंगवा कर उनको पिलाने लगे लेकिन वो नहीं पी पाये। हम लोग उनको तुरन्त डाक्टर के पास ले कर निकल गये लेकिन उनका रास्ते में मृत्यु हो गयी। उस समय लग रहा था मेरे पैर तले जमीन खिसक गई हो। लग रहा था कि हम मर जायेगें। हमको होश नहीं था मेरा पुरा बदन बेजान हो गया और मेरा सब कुछ खत्म हो गया था। अब इस दुनिया में मेरे लिए कुछ भी नहीं बचा था। फिर हमलोग उन्हें घर ले आये उनका दाह संस्कार ग्रामिणों के सहयोग से कर दिये। हम उस समय उनके साथ ही जलने जा रहे। लेकिन लोगों ने हमे पकड लिया हमे जलने नहीं दिया। हमको समझाया कि तुम्हारे छोटे-छोटे बच्चे है उनको कौन देखेगा। फिर हम भी हिम्मत किये और लकडी मील के मालिक के पास गये थे। मूरत यादव पिता स्व0 बंधन यादव ग्राम-केलपुर] पोस्ट-अरखागो] थाना-घनवार] जिला-गिरडीह के निवासी और दुसरा ब्रम्हदेव यादव पिता स्व0 खुभो महतो ग्राम-तरोनिया पोस्ट-निमाडीह] थाना-घनवार] जिला-गिरिडीह और तीसरा मुजाहिद अंसारी पिता महरुम सकुर मिया] ग्राम व पोस्ट-निमाडीह] थाना-घनवार] भी आया हमलोग भी वहा गए हमलोग बोले की हमलोगे थाना जा रहे है तो वो लोग एक बोन्ड पेपर बनाया और उसमें साईन किया कि आप लोग थाने मत जाइये हमलोग आपके भविष्य के लिए उचित मुआवजा देगे और फिर उसी दिन 10 हजार रुपये दिया और बोला की 20 हजार उस दिन देगे जिस दिन सब लोग एक साथ होगे। लेकिन आज तक उन लोगो ने पैसा नहीं दिया और जब मेरे जेठ फोन किये तो उन लोग मना कर दिया की हमलोग पैसा नहीं देगे जो करना है कर लेना। हमको बोले कि तुमको कहा जाना है जाओ हम देख लेगे एस0 पी0] डी0 एस0 पी0 सब को हम अपने जेब में रखते है। हम कोई पैसा नहीं देगे और किसी भी तरह का मुआवजा भी नहीं देगें।
यह बात सुनकर हमे लगा कि अब मै अपने बच्चों को कैसे पालूगी। वो लकडी मील जो चलाता था उसमें रात में काम करवाता था। ये बात मेरे पति हमें बताते थे। तब मै बोली कि सरकार से छुपकर लकडी कटवाता है और रात में चिरवाता है सो सब बोल देगे पर वो नही डरा और हमें धमकाते हुए कहा कि जाओ जो करना है कर लेना हम सबको खरीद लेगे। हम अपना और अपने बच्चों का कैसे पालन पोषण करेगे। मेरा दोनो बच्चा हमेशा पापा को याद करता है। हम उनका चेहरा देख कर टुट जाते है। मेरा दिल रो पड़ा और मै फिर अपने घर वापस आ गई। कई लोग बोले कि केस कर दो पर मेरे पास घर में खाने के पैसा नहीं है तो केस कैसे करते है। उस दिन से आपने ही घर में भूखी-प्यासी रहती हॅू। किससे कर्ज लू। कोई कुछ काम करने को कहता है तो कर देती हूW और जो पैसा मिलता है। उसी से अनाज ला कर खाती हॅू।
        मै चाहती हॅू कि लकड़ी मील मालिको के साथ कानूनी कार्यवाही हो और उसे सजा मिले और हमें न्याय मिले।

 साक्षात्कारकर्ता - ओंकार विश्वकर्मा                         
 संघर्षरत पीड़िता- सुनीता मसोमात