Tuesday, 28 April 2015

हमारा पुरूषवादी समाज का धिनौना हरकत एवम 15 वर्षीय बच्ची को अधेरे में चुप रहने को मजबूर किया

मेरा नाम शिवशंकर उम्र-54 वर्ष है। मैं जाति का शर्मा हुँ। मैं ग्राम-दनियालपुर, थाना-शिवपुर, जिला-वाराणसी का निवासी हुँ। मैं एक छोटा सा सैलुन लहरतारा (बउलिया) पर चलाता हुँ। मेरी पत्नी का नाम राजकुमारी शर्मा है। मेरे पास तीन बच्चें है, जिसमें सबसे बड़ा बेटा 18 वर्ष का है और दो बेटी जो कि एक 15 वर्ष जिसका नाम अंजली और दुसरी बेटी का नाम शिवानी जो 08 वर्ष है और मेरे बडे बेटे का नाम आशीश शर्मा है। मेरी आर्थिक स्थिति उतनी अच्छी नही है। लेकिन किसी तरह बच्चों को शिक्षा दिला रहा है।
घटना दिनांक 18 अक्टूबर, 2013 सुबह 07:00 बजे मेरी बेटी अंजनी शर्मा कक्षा-9 का परीक्षा देने के लिये (शिवपुर) दीनानाथ पब्लिक स्कुल में जा रही थी कि मेरी बेटी परीक्षा स्थल पर न पहुचकर किसी दरिन्दों के हाथ लग गयी। जब मेरी बेटी घर पर शाम को नही पहुँची तो घर के सारे सदस्य परेशान होकर खोजने लगे मेरी पत्नी दुकान पर फोन की अभी तक अजंली घर पर नही पहुँची है, इतना सुनते ही जैसे लग रहा था, मानो पैरो तले जमीन खिसक गयी हो, मैं दुकान बन्द करके किसी तरह भागकर घर गया तो देखे मेरा परिवार पागलो की तरह बेटी को खोजने में लगा है, मैं भी हर जगह सट्टी चैराहा स्टेशन पर कई दिनों तक खोजता रहा| मेरे घर के बगल में रवि कुमार मौर्या आता जाता था, उस पर मेरी बेटी के साथ देखने का नजरिया ठीक नही था क्यों कि दो तीन बार मेरी बेटी अपनी माँ से बता चुकी थी कि माँ रवि कुमार मौर्या स्कुल जाते समय परेशान करता है।
जिस समय मेरी बेटी गायब हुयी तो देखे कि रवि कुमार मौर्या भी घर पर नही है। तब मैं रवि के बडे पापा अध्या कुमार मौर्या से पुछा कि मेरी बेटी को कहा गायब किया गया है। रवि से कह दिजियेगा, जहाँ भी हो मेरी बेटी को घर सही सलामत पहुँचा दे। लेकिन रवि के बडे़ पिताजी अध्या कुमार मौर्या बोले कि हमारे रवि से कोई मतलब नहीं हैं। मैं कह सुनकर परेशान हो गया तो देखा कि बातो से मेरी बेटी नही मिलने वाली है, तब मैं दस दिन बाद शिवपुर थाने में एफ.आई.आर दर्ज कराने गये तो पुलिस वाले एफ.आई.आर न दर्ज करके हमें दो दिन तक मानसिक और शारिरीक रुप से परेशान किये, तब मैं परेशान होकर घर चला गया तीसरे दिन एक साथी के साथ कहचरी में गये और सी00 कार्यालय में एफ.आई.आर कराने मैं दिन भर का समय बित गया, इतना समय बिताने के बाद भी दुसरे दिन थ्प्त्  का नकल मिला।
जिसमें की एफ.आई.आर कराते समय मैं चार लोगों को नामजद कराया था। जिसमें अध्या कुमार मौर्या, दशरथ मौर्य, शिवशंकर प्रसाद मौयर्, सारथी मौर्य लेकिन जब एफ.आई.आर की कापी देखे तो उसमें दिनांक मुल्जिम रवि कुमार मौर्य का नाम था, बाद में पता चला कि अध्या कुमार मौर्य थाने पर पैसा देकर चारो लोगों का नाम कटवा दिया था। मैं एफ.आई.आर पढ़कर सन्न रह गया कि सोचने लगा कि पैसों की दुनिया है। किसी कि बेटी गायब हो प्रशासन को इसकी चिन्ता नही है। लेकिन अपराधी को बचाने की चिन्ता जरुर है। मैं हताश होकर घर चला गया बेटी को खोजते पता करते चार महिना का दिन बीत गया लेकिन मेरी बेटी घर नही पहूँची, बराबर दिमाक में चिन्ता बनी रहती थी कि लोग मेरी बेटी के साथ कैसा व्यवहार कर रहे होगे किस हाल में मेरी बेटी होगी, कुछ भी अच्छा नही लगता है।
दिनांक 23 फरवरी, 2013 को पोस्ट मैन मेरी बेटी की राइटिंग में लिखा हुआ पत्र भेजा गया। जिससे कि लोग दबाव बनाकर मेरी बेटी से लेटर लिखवाये है। क्योकि अभी मेरी बेटी 15 वर्ष की नाबालिक है। लोग जिस तरह का दबाव बनाते होगे उसी तरह मेरी बेटी करती होगी। लेकिन रवि कुमार मौर्य 25 साल का है जो इस तरह का व्यवहार एक गरीब परिवार से कर रहा है न जाने कौन सी दुश्मनी का बदला निकाल रहा है। मेरी बेटी जब से गायब हुयी है। ऐसा लग रहा है।
पुरा जीवन का अन्त ही हो गया किसके सामने में मुह दिखायेगे कैसे हम अपनी दुसरी बेटी की शादी करेगे| आस-पडोस के लोग भी हर वक्त काना फुँसी करते है। घर से निकलता हूँ तो सिधे दुकान जाता हुँ। लेकिन बेटी तो जैसे दिमाक से निकालती ही नही है, मेरी पत्नी मेरा बेटा रोते बिलखते घर में पड़े रहते है। ऐसा लगता है। पुरे जीवन भर की कमायी हुयी इज्जत बिगड़ गयी है। कैसे बिरादरी में जाकर मुँह दिखायेगे इस समय बिरादरी के लोग भी दुसरी नजरिये से देखते है। लोग कहते है। बेटी को पढ़ाइये क्या बेटी को शिक्षा देने का यही तोफा मिलना था, इस तरह अगर समाज में बेटी गायब होने लगेगी तो कौन पिता अपनी बेटी को पढ़़ायेगा, इतना पैसा या ऊँची बिरादरी के तो है नही कि पैसा या जाति के बल पर इज्जत ढक जायेगा। मुझे बराबर धमकी मिल रही है कि केश को वापस लेकर सुलहनामा करवा लिजिये नही तो आपकी बेटी को जान से मारकर लाश आपके घर भेजवा दुंगा ।
आपको अपनी बात बता तो रहा हुँ लेकिन अन्दर से मन में डर बना हुआ है कि मेरी बेटी को किस हाल में रखे होगें।


साक्षात्कारकर्ता - छाया कुमारी                                    
संर्घषरत पीड़ित- शिवशंकर शर्मा