आज
भी हमारे देश में महिला की जिन्दगी को वर्बाद करने में जरा सी भी संकोच नहीं करते।
उन्हे अपमानित करना उन पर हसना पुरुषों की आतद है आइये एक ऐसी ही पीड़िता की कहानी
उसी के जुबानी से सुने।
मेरा
नाम अमरावती देवी उम्र 60 वर्ष मेरे पति का नाम मूलचन्द्र मुसहर
ग्राम-थानेरामपुर, पोस्ट-थानेरामपुर, थाना-फूलपुर, तहसील-पिण्डरा, जिला-वाराणसी
की मूल निवासी हूँ। मै अपनी लड़की की शादी ग्राम-खुर्द पसिपाही, पोस्ट-कठिराव, थाना-नेवढिया, जिला-जौनपुर
में दिनांक 9 दिसम्बर, 2009 को
पूरे हिन्दू रीति-रिवाज के साथ किये थे। जो कुछ हो सका हम उन्हे दिये। शादी के बाद
कुछ दिन तक सब कुछ ठीक-ठाक था मेरी बेटी जब दोवारा ससुराल गयी तो मेरे दामाद
धर्मेन्द्र व सास शान्ति देवी द्वारा हमारे बेटी को बात-बात पर मार-पीट कर घर से
निकाल देते थे कि तुम अपने माँ-बाप से सिकड़ी, अगूठी
माँगकर लाओं तभी तुमको रखेगे | यह सब मेरी बेटी सहती लेकिन कभी हम लोगो से नहीं
कहती थी एक बार मेरी बेटी को बहुत मार दिये थे| हमारी बेटी हमारे घर थानेरामपुर
आयी तो कुछ दिन मेंहनत मजदूरी करके खिलाये इसके बाद सिपा बीबी के घर पंचायत हुआ कि
हमे सिकडी अगूठी नही चाहिए आप लड़की का विदाई कर दिजिये फिर मै पंचायत की बात मानकर
फिर हम लोगो ने अपनी लड़की विदाई कर दी ससुराल जाने के बाद मेरी बेटी को धर्मेन्द्र
व उसकी सास शान्ति देवी द्वारा मार-पीट कर घर से भगा दिया गया। उस समय मेरी बेटी
रोते हुए त्रिलोचन की तरफ चली गयी उसका दिमाक काम नहीं कर रहा था तो वह भठ्ठा पर
जा रही थी।
तभी उसे देखकर एक औरत अपने घर रख लिया और जब मेरी लड़की की लापता की सुचना
मिली तो मै खुर्द पसिपाही गयी तो वह लोग बोले की तुम्हारे लडकी यहा से भागकर
तुम्हारे घर गयी है तुम लोग छिपा कर रखे हो यह सूनकर मै रोते हुए वापस घर आने लगी।
पास में पैसा भी नहीं था कि गाडी पकडकर अपने घर आ जाऊ किसी तरह पैदल अपने घर आ गयी
आयी शाम हो गया था रात में नीद आ रही थी कि मेरी बेटी कहा होगी कही मेरी बेटी को
मार तो नहीं दिये|गयी यहो सोचते-सोचते सुबह हुआ तो मै फूलपुर थाने पर गयी तो वहा
से पुलिस वाले मुझे कठिराव पुलिसचौकी पर भेजे पुलिसचौकी पर जाकर मै आवेदन दिए तो दो
पुलिस वाले मेरे साथ खुर्द पसियाही मेरे दामाद के घर गये तो मेरे दामाद धर्मेन्द्र
सास शान्ति घर पर नहीं मिलें।
सुबह कठिराव पुलिसचौकी पर गये तो पुलिसचौकी के दिवान ने कहा कि खुर्द
पसिपाही नेवढ़िया थाना अन्र्तगत अंतर्गत अन्तरगत\आता है तुम नेवढ़िया थाने पर जाओ नेवढ़िया
थाने पर गये तो वहा तैनात दरोगा पुलिस वाले बोले कि तुम्हारी लड़की का किसी से
चक्कर रहा होगा इस लिए वह भाग गयी होगी पर कहते हुए पुलिस वाले मेरे लड़की की शादी
का कागज को फेककर बोले चलो जाओं यहाँ से वहा तो ऐसा होता है हम लोग किससे-किससे
जुझेगें। चलो भाग जाओ तब देा पुलिस वाले बोले दो हजार रुपये दो मै तुम्हारे दामाद
को पकड कर लाऊगा तो तुम्हारी लड़की मिल जायेगी। मै बोली साहब बनी मजदूरी करके किसी
तरह खर्च चलाते है मेरे पास इतना पैसा नहीं है तब पुलिस वालो ने कहा तब यहा क्यो
आयी हो चलो भाग जाओ यह सुनकर मै सोचने लगी की गरीबो की सुनने वाला कोई नहीं है यही
एक उम्मीद थी वह भी टूट गयी।
सुबह हुआ तो दो सिपाही वाले मेरे घर आये और बोले की
तुम अपना आवेदन लो जलालपुर जाओं तब जलालपुर थाने पर गयी तो जलालपुर के दरोगा ने
कहा कि नेवढ़िया थाने पर जाओ यह हमारे थाने के अंर्तगत नहीं आता है तब मै फिर नेवढ़िया
थाने पर गयी तो उमाशंकर सिपाही द्वारा कहा गया कि तुम अपनी लड़की को खोजकर लाओं तब
कुछ होगा तब मै अपनी लड़की का पता कर रहे थे इसी बीच मेरी लड़की का पता चला कि हमारी
लड़की जलालपुर ईट भट्ठा नेवादा में मिली उसे लेकर अपने घर गयी मेरी बेटी के पास एक
लड़का है तै उसको बनी मजदूरी करके देख-रेख कर रही हूँ।
मै आप को अपनी आपबीती बातो को बताकर हल्कापन
महसूस कर रहा हॅू।
साक्षात्कारकर्ता
- प्रभाकर प्रसाद
संघर्षरत
पीडिता - अमरावती देवी
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