Wednesday, 28 October 2015

क्यों हम गरीब को झुठे केस में फसाती है पुलिस !


मेरा नाम रामू घसिया पुत्र - स्व0 छल लाल घसिया, उम्र-25 वर्ष जाति-आदिवासी (घसिया) हमारे पास 2 लड़की है, मैं ग्राम-रौप (घसिया बस्ती), पोस्ट-सहिजन कला, थाना-राबटर्सगंज, जिला-सोनभद्र का मूल निवासी हूँ।

घटना दिनांक 25 फरवरी, 2015 रात समय लगभग 1:00 बजे को हमारे गाँव के राजकरन घसिया की हत्या पशु तस्करों द्वारा की गयी। पता चला कि पशु तस्कर जंगल के रास्ते पशुओ को पकड़ कर जंगल के रास्ते से बिहार झारखण्ड में ले जाकर बेच रहे है। उसी समय राजकरन घसिया और बस्ती के लोग रात में पशु तस्कर को पकड़ने के लिए जंगल में गये थे। पशु तस्कर 5-6 की संख्या में हथियार से लैस थे, सभी पशु तस्करों से मिलकर राजकरन घसिया की हत्या कर दिये जो इस समय पुलिस की गिरफ्त में है। मैं व मेरा भाई और मेरा भतीजा उस समय काम करने के लिए डी0डी0 आहुजा कम्पनी इलाहाबाद गये हुए थे। जिससे हम गरीब अपना तथा अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। जब हमलोगों को इस घटना की जानकारी हुयी तो हमलोग वापस अपने घर आ गये और अपने-अपने परिवार के साथ रहना शुरु कर दिये। दिनांक 8 मार्च, 2015 को दो पुलिस वाले एक मोटर साइकिल से हमलोगों के घर पर आ गये। हमलोगों की गैर मौजुदगी में हमलोगों के परिवार की महिलाओं को माँ-बहन की भद्दी-भद्दी जाति सूचक गालियां देने लगे। बोले कि लाला, नरेश, रामू को बोल देना कि उन लोगों के ऊपर हत्या के जुर्म में गुण्डा एक्ट का केस लगा हुआ है। सभी लोग कचहरी जाकर जमानत करा लो नही तो जेल जाओंगे। जब हमलोग इलाहाबाद से वापस आये तो हमलोगों के परिवार की महिलाये और बस्ती के लोगों से इस बात का पता चला तो हमलोग के होस उड़ गये। घर में हमारी बीवी, भाभी व पतोहू ये सब सारी बाते पता रही थी और रो रही थी। उन्ही लोगों को देखकर मुझे भी रोना आ गया। सभी लोग सोच रहे थे कि अब हमलोग क्या करें | किस तरह से अपना जमानत कराये, क्योंकि हम गरीब बेरोजगार किसी तरह से बनी मजदूरी करके अपना तथा अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे है।

 मेरे जेल जाने से मेरा परिवार दाने-दाने को मोहाल हो जायेगा और भीख मांगने की स्थिति पैदा हो जायेगी। यही सोचकर मै भी रो रहा था अगले दिन सुबह में मेरे भाई और मेरा भतीजा कचहरी गये और वहां पर वकील से मिले और अपने ऊपर लगे फर्जी गुण्डा एक्ट के बारे में जांच कराये परन्तु कुछ पता नहीं चला और हमलोग घर वापस आ गये। घर आने पर अपने परिवार को बताये कि वकील के पास गये थे परन्तु ऐसी कोई घटना का पता नही चला। 10-20 दिन बाद हमलोगों के बस्ती में एक गाड़ी पुलिस जीप से आयी और हमलोगो के परिवार को माँ-बहन की भद्दी-भद्दी जाति सूचक गाली व धमकी देने लगी और बोले कि लोगों को जल्दी गिरफ्तार करवाओं नही तो तुम लोग भी जेल जाओगी। तब हमलोग फिर अगले दिन कचहरी गये और वहाँ पर वकील से मिले तो पता चला कि हमलोगों के ऊपर हत्या के जुर्म में गुण्डा एक्ट लगा हुआ है। हम सभी लोग कचहरी से वापस घर आये तो परिवार के साथ हमलोगों का भी रो-रो कर बुरा हाल हो गया था। जब परिवार का मुखिया नही रहेगा तो घर का खर्च कैसे चलेगा। उस दिन हमारे घर में चुल्हा नही जला बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया था। हमलोगों का परिवार दाना-दाना के लिए तरस जायेगा। लोग भुखे मर जायेगे। यही सब सोचकर रो-रहे थे। उस समय आँखों से आँसू नही जैसे खून निकल रहा हो। मेरी पत्नी और बच्चें का रो-रो कर बुरा हाल हो गया था। हमलोगों को न भुख लग रही थी और ना ही नींद आ रही थी।

 मैं अपना जमानत कराने के लिए जमीन गिरवी रख दिया तो जाकर मेरा जमानत हुआ। कभी-कभी रात कर डर के मारे नींद नही आती। अब तो काम करने का भी मन नही करता हमेशा डर बना रहता है कि पुलिस वाले कब हमको जेल में ना डाल दे, यही ख्याल मन में हमेशा बना रहता है कि जब पुलिस वाले हमको जेल में बन्द कर देगे तो हमारे परिवार और बच्चों का क्या होगा। पुलिस वाले हमलोगो को फर्जी गाजा, शराब तथा हत्या के जुर्म में फसाकर बन्द न कर दे। पुलिस वाले हमलोगों को इज्जत से कब देखेगे तथा फर्जी धारा लगाना बन्द कर देगी। 

मैं ये सब बाते बताकर अपने शरीर से हल्कापन महसुस कर रही हूँ।

  साक्षात्कारकर्ता  - महेश कुमार गुप्ता $ पिन्टू गुप्ता                           संघर्षरत पीडि़त - रामू घसिया