Thursday, 28 May 2015

‘‘देश और समाज की रक्षा करने वाला पुलिस ने बना दिया चोर कातिला’’

  आज भी समाज में पुलिस विभाग देश व कानून की रक्षा के लिए बनाया गया ही लकिन पुलिस वाले ही किसी को चोर व डाकू बनाकर उनकी जिन्दगी के साथ खेल रहे है, आइये सुनते ही ऐसी एक पीड़ित की कहानी उसी के जुवानी से।
मेरा नाम राम सूरत उर्म 32 वर्ष, पिता राम लाल, ग्राम-रौंप, घसिया बस्ती, पोस्ट- सहिजनकला, थाना- राबटर्सगंज, जनपद-सोनभद्र है। मेरे 4 लड़के और 1 लड़की  है। मैं अनुसूचित जनजाति का रहने वाला हूँ। मैं बनी मजदूरी करके अपने परिवार न बच्चों का पेट-पालता हूँ।
घटना- दिनांक 9 जनवरी 2012 की सुबह लगभग 8:30 शाम पर उसी दिन रिद्रन आॅफ नार्थ इण्डिया प्रोग्राम लखनऊ से त्रिवेनी एक्सप्रेस ट्रेन से सुबह लगभग 6:00 शाम रेवले स्टेशन राबटर्सगंज आये और फिर लगभग 7:30 शाम पर घर आये और आकर अपने चैकी पर बैठकर आराम कर रहा था कि अचानक 10 पुलिस जो अपने वर्दी में थे आकर हमारे घर को चारो तरफ से घेर लिये। कि अचानक सी0ओ आकर मेरा कालर पकड़कर माँ-बहन की भद्दी-भद्दी गाली देने लगे और पकड़कर घर से बाहर निकाल दिया। तब मैं सी0ओ साहिब से बोला कि साहब आप ये क्या कर रहे है अभी मै लखनऊ से प्रोग्राम  से वापस आ रहा हूँ तो सी0ओ साहब बोले कि तुम झूठ बोल रहे हो चलो तुमको बड़े साहब के पास लेकर चलता है। तब मेरी पत्नी (दुलारी देवी) बोली कि साहब इनको कहा लेकर जा रहे हो इनका क्या कसूर ये अभी बाहर से आ रहे है। तब पुलिस वाला बोले कि ये पति पत्नी दोनों नौटंकी कर रहे है। तब पुलिस मुझे पकड़ ली और 4 पुलिस वालो ने मेरी पत्नी को घर के बाहर पत्थर पर पटक दिये और दो पुलिस वाले मेरी पत्नी के कमर पर लात से 2 लात मारे और डण्डे से रान पर मारे उदसी मार से मेरी पत्नी का प्रसव वही तुरन्त हो गया और माँ-बहन की भद्दी-भद्दी जाति सूचक गाली देने लगे।
तब मेरी पत्नी के फूफा ने पुलिस वालो से पूछा कि साहब दुलारी देवी को अनायास के क्यो मार रहे है। तब पुलिस वाले मेरी पत्नी के फूफा को भी लात, मुक्का, डण्डे से बहुत ही बेरहमी से जानवरों की तरह मारना शुरू कर कर दिये और साथ ही उनको माँ-बहन की भद्दी-भद्दी गाली देने लगें। जब मेरी पत्नी का डिलेवरी वही पर हुआ तो पुलिस वाले मेरी पत्नी को छोड़कर भाग गये और मुझे 8:00 रात को पुलिस वालो ने अपनी जीप में बैठा लिये और थाना- राबटर्सगंज, ले गये और मुझे लाकप में बन्द कर दिये। शाम लगभग 7:00 बजे लाकप से बाहर निकाल कर पूछ-ताछ कर रहे थे और मेरे बदन पर (पीठ,पैर, तारू) कपड़ा उतार कर रूल से मारने लगे। मैं चिल्ला रहा था। वे बार-बार कह रहे थे कि तुम लोग सब माल कहा रखो हो बता दो मै तुम्हें छोड़ दुँगा तब मै बोला कि सादन मे रिक्सा चला कर अपने तथ अपने परिवार को पालन-पोषण करता है। इसके बाद पुलिस वालो ने मझे इतना मारा कि मैं विहोश हो गया। तब एक पुलिस वाले ने मेरे चेहरे पर पानी का छिट्टा मारा मेुझे होश आया इसके बाद पुलिस वाले ने मुझे करेन्ट सटाकर मार रहे थे। साथ ही दो पुलिस वाले शराब पीकर आये फिर से मुझे उघारे बदन पर मारने लगे। तब मैं जोर -जोर से चिल्ला रहा था कि मुझे छोड़ दिया जाय।
मैं बेकसूर हूँ तो पुलिस वाले फिर से मारने-पीटने लगे। जब मैं दर्द से कराह रहा था तो मैं बोला साहब मेरे शरीर बहुत दर्द कर रहा है। अगर कोई दवा देदें। तब पुलिस वाले लात-घुसा तथा रूर से मेरे पीट, पेट, गाल पर मारने लगे, मारने के बाद मेरा बयान लियें। जो पुलिस वाले मुझे मार-पीटकर गलत बयान लिये और मेरी बस्ती से तीन लोग (फूलचन्द, केशव, रामभरोस) कोतवाली राबटर्सगंज गये और मुझे दिनांक 9 जनवरी, 2014 को रात में लगभग 9:00 बजे पुलिस वालो ने मेरा बयान लिया और फिर मुझे छोड़ दिया। पुलिस वालों ने मेरा घड़ी,पर्स जिसमें 500/रुपये था सब ले लिये। मेडिकल भी नहीं कराये।
 मैं जिला अस्पताल में अपने मेडिकल करवाने गया तो कोई भी डाक्टर मेरा जाँच नहीं किया और डाक्टर बोले कि तुम लोगो कोई जाँच नहीं होगा और न ही दवा मिलेगा, डाक्टर बोले जो करना हो कर लेना। क्योकि ये आदेश बडे़ डाक्टर ने दिया है। मेरी पत्नी का कोई भी जाँच व दवा नही किया गया। तब कचहरी से पता चला कि तुम लोग पुलिस वालो और डाक्टर से मार-पीट किये हो। इस लिये तुम्हारे ऊपर मुकदमा अपराध संख्या 65/12 धारा 147, 148, 186, 332,353, 336, आई0पी0सी एक्ट से फर्जी मुकदमा पुलिस द्वारा लगाया गया जो गलत है जिसका हमलोगों ने न्यायालय से फर्जी केस का मुकदमा लड़ रहे है और जमानत भी करा लिये है। जो कि दिनांक 7 जनवरी, 2012 को शाम 6:00 बजे रिद्रम आफ नार्थ इण्डिया का प्रोग्राम के लिये गया था। जिसके मुख्य अतिथि माननीय अवनीश अवस्थी (सचिव उच्च शिक्षा विभाग) थे।
अगले दिन 8 जनवरी, 2012 को शाम 4:00 बजे त्रिवेणी एक्सप्रेस से चले और अगले दिन 9 जनवरी, 2012 को सुबह लगभग 6:00 बजे राबटर्सगंज आया। तो बाद पता चला कि मेरे खिलाफ जितेन्द्र कुमार सिंह पुत्र राजेन्द्र सिंह ट्रक चालक ट्रक सं0 64/7414 जो बलिया खुर्द, पोस्ट-शिकार गंज, थाना-चकिया, जनपद-चन्दौली उ0प्र0 का निवासी है। जिसने मेरे खिफाल फर्जी तरीके फसाने के लिए मेरे ऊपर मु0अ0 सं0 64/12 धारा 394 आई0पी0एक्ट 9/12 का फर्जी मुकदमा लगवाया है। जो सरासर गलत है।
आपको अपनी बात को बता कर हल्का पन महसूस कर रहा हूँ।

साक्षात्कारकर्ता- पिंटू गुप्ता

संघर्षरत पीड़ित - राम सूरत

क्यो किया गया दलित को घर से बेघर

आज भी हमारे देश में पहले जैसा व्यवहार दलित अतिवंचित के ऊपर किया जा रहा है। हर पैसा बाल गरीबों व दलितो का शोषण करने से पीछे नही हटता आज भी उन्हें समाज से गिरी हुई नजरों से देखता है। उनकी जमीन जबरदस्ती हड़पने के लिए तैयार है। उसे अपनी कमाई से पेट नही भरता आइये ऐसी ही एक कहानी मालती देवी की जुबानी सुने।
मेरा नाम मालती देवी उम्र-40 वर्ष मेरे पति का नाम गनेश है। मेरे परिवार में एक लड़का, 3 लड़की व मेरे पति रहते है। मैं ग्राम-बभनउली, जिला-सोनभद्र की रहने वाली हूँ। मेरे पति मजदूरी का काम करते है। हमारी एक लड़की दोनों आँख से बिकलांग है। हम यब निहाय गरीब व जाति के चमार है। गरीबी के कारण बड़ी मुश्किल से अपना व परिवार का भरण-पोषण करते है। यहाँ तक कि कभी-कभी भूखों सो जाते है। हमारे पति को बाराबर काम भी नही मिलता कि घर का खर्च चल सके ग्राम प्रधान हम लोगों को नरेगा में काम भी नही देते है। गाँव सभा की जमीन पर 40 वर्ष से अपना दो खपरैल का घर व एक झोपड़ी बनाकर गुजर बसर करती थी। इस बीच मेरे लड़के की तबियत बहुत खराब हो गयी दवा के अभाव में उसकी हालत निरन्तर बिगड़ती गयी बच्चे की दवा करने के लिए घर में एक भी पैसा नही था सब मेरे पति बोले इस जमीन में से थोड़ा जमीन बेचकर जो पैसा मिलेगा उसी से बच्चे का दवा करेगें। तब मैं अपने पति से बोली अगर जमीन बेचेगें तो कहाँ रहेगे जो आपको अच्छा लगे करो मैं नही जानती इतना कहकर मैं तिअरा चली गयी मेरे जाने के बाद मेरे पति को ग्राम प्रधान सत्यनारायन एक सदस्य को भेज कर मुन्नु के घर पर बुलवाये वहाँ पाँच साल लोग थे।
जब मेरे पति वहाँ गये तो लोग उन्हें दारु पिलाकर बोले कि इसमें से थोड़ा जमीन मुझे दे दो प्रधान ये भी कहे कि मैं तुम्हें 60 हजार रुपयेद दुँगा और कालोनी में तुम्हारा एक आवास भी बनावा दुंगा लोग मेरे पति से स्टाम्प पेपर पर पंचनामा लिखकर उनके अगूंठा लगवा लिए और बोले थोड़ा जमीन मुझे भी दे दो जब जमीन का पंचनामा हो गया तो प्रधान से जब मेरे पति पैसा मांगे तो प्रधान बोले एक भी पैसा नही देगे मेरे पति वहाँ से उदास होकर घर चले आये उस समय लोग उन्हें शराब पिलाये थे। जब वो घर आये तो हमने पूछा क्या हुआ तब तब मेरे पति बोले प्रधान मेरे साथ गद्दारी किया मुझसे एक कागज पर साइन करवा लिया और पैसा नही दिया उस समय उस प्रधान मेरे बहुत गुस्सा आ रहा था। इधर मेरा लड़का बिमार उधर प्रधान मेरे साथ धोखा किया पंचनामा के एक महिने बाद प्रधान गाँव के पाँच छः लोगों के साथ समय 10:00 बजे सुबह हमारे घर आया और बोला घर खाली करो तब मै बोली घर मेरा है। मैं खाली नही करुगी तब प्रधान व उसके साथी मुझे व मेरी अंधी बेटी को लात घुसों से पेट पीठ व पैर पर मारने लगे मैं और मेरी बेटी दर्द से कराह रही थी उस समय जी कर कर रहा था कि प्रधान को जान से मार दु लेकिन हम गरीब के पास इतना साहब कहां मैं और मेरी बेटी जोर-जोर जान बचाने की गुहार गाँव वालों से की आवाज सुनकर कुछ आये तो प्रधान को समझाये लेकिन प्रधान नही माने हमारे झोपड़ी को उजाड़ कर फेक दिये जब मैं रोती बिलखती कोटवाल के पास गयी तो वहाँ कोतवाली वालों भगा जाओं यहाँ तुम्हारी सुनवाई नही होगी। प्रधान भले थाने पर 25000/- हजार रुपये दे दे। लेकिन तुम्हे नही देगे। मैं निराश होकर घर चली आई कोई कार्यवाही नही की गयी जब मैं घर आई तो देखी प्रधान नेय खोदकर दिवाल जोड़वा रहा थे। वह उसपे घर बनवा कर एक सेठ को डेढ़ लाख रुपये में बेच दिये मेरा थोड़ा सा जमीन बचा था उस पर भी प्रधान हमारे बस्ती के एक व्यक्ति का झोपड़ी लगवा रहे है। जब हमने मना किया तो नही माने प्रधान हमें वहाँ से भगाना चाहते है। मै फिर कोतवाली आई और दरोगा को 3000/- रुपये दी तो बोले तुम जाओ घर बनाकर रहो अब कोई कुछ नही बोलेगा। मैं घर आई और उस जमीन पर घर बनाकर रहने लगी। अब मैं चाहती हुँ कि मुझे उस जमीन से फिर न भगया जो आपको अपनी कहानी बताकर अपने को हल्कापन महसूस कर रही हूँ
साक्षात्कारकर्ता -पिंटू गुप्ता                          

संघर्षरत पीडिता -मालती देवी

Saturday, 23 May 2015

ससुराल दुवारा दहेज़ के लिया मारा-पिटा जाने लगा!

मेरा नाम पुष्पा देवी उम्र-20 वर्ष पति महेश द्वारा ग्राम-तेतरियाडीह, पोस्ट-तेतरियाडीह, थाना-जयनगर, जिला-कोडरमा की मुल निवासी हूँ।
मैं अभी अपने माईके में ही रह रही हूँ। ग्राम-डंडडीह, पोस्ट-जयनगर, थाना-जयनगर, जिला-कोडरमा
मेरी घटना यह है कि मेरी शादी स्व0 प्रसादी दास के बेटे महेश दास के साथ 27 अप्रैल, 2012 को हुई थी। शादी में मेरा पुरा परिवार खुश था मै भी बहुत खुश थी। शादी में जो वो लोग मांगा था, सब मेरे पापा दिये बस गाड़ी नही दिये क्यों कि मेरे पापा के पास उस समय पैसा नही था। शादी तो ठीक-ठाक से हो गया। शादी हो के जब हम अपने ससुराल गए तो देखे की मेरे पति गोतनी बेबी देवी जो कहती नही करते फिर भी हम कुछ नही बोले सोचे धीरे-धीरे सब कुछ ठीक हो जाएग। शादी के बाद मेरे पापा हमको लेने आए दुवार लगाने के लिए लेने के लिए तो मेरा ससुराल वाला लोग हमको भेजने से साफ मना कर दिया कि नही आप जब तक गाड़ी नही दिजीएगा तब तक लड़की नही जाएगी हम जब यह सुने तो बहुत रोये मेरे पापा भी दुःखी होकर वापस चले गये शादी का तीन महिना बाद मेरे पापा किस्त पर गाड़ी निकाले और ले जाकर दे दिये तो वो लोग हमको आने दिया।
हम जब अपने माईके से ससुराल गए तो मेरे पति बात-बात पर हमको मारने लगे और मेरी गोतनी भी हमसे कहती तुम अपने पति से दूर रहो और जब हम नही मानते तो हमको मेरे पति से कुछ ना कुछ कह कर मार खिलाती और खुद भी कई बार मारा लेकिन मेरे पति कुछ नही बोलती हमको बहुत दुःख होता फिर भी हम कुछ नही कहते थे। मेरे ससुर सिकेन्द्र दास भी हमको गन्दी-गन्दी गाली देता उस उस समय लगता था। हम क्या करे कि मेरे साथ ऐसा क्यों हो रहा, फिर भी हम सब कुछ सह कर रहे थे। इसी तरह उन लोग का दिन प्रति दिन हिम्मत बढ़ता गया। हम यह बात अपने माइेके वालो को बताए तो वो लोग हमको वहाँ से ले आया और कोडरमा महिला थाना में आवेदन दिया तो वो लोग मेरे पति को पकड़ कर ले आया थाना तो मेरा पति बोला कि अब ऐसा नही करेगे और घर आकर फिर ऐसे ही करने लगा हर बार हमको मारता और मेरे पापा आकर हमको ले आते हमलोग बहुत गरीब है। मेरे पापा मोची है। हमको मेरे ईलाज के लिए पापा के पास पैसा नही था तो मेरे पापा मेरा जेवर दो बार बन्धक रख दिये फिर हम अपने ससुराल चले गये लेकिन एक दिन तो हद हो गया। मेरा ससुराल का पुरा परिवार मिलकर हमको बहुत मारा हम उठ नही पा रहे थे। फिर भी हिम्मत कर के उठे और अपने पापा को फोन कर के सारी बात बताए तो मेरी माँ और मेरी चाची यहाँ से गयी जब मेरी माँ मेरी हालत देखी तो बहुत रोई हम भी बहुत रोये तो मेरी माँ मेरा गोतीया माई को बुलाई और ससुराल वाला भी वही था तो वो लोग मेरी माँ को समझा बुझा कर यह कह कर भेज दिया की आप अभी आठ दिन के लिए ले जाईये फिर यह जाकर ले आएगा मेरी माँ हमको वहाँ से ले आई यहाँ लाकर डाक्टर से दिखाई तो जाकर ठीक हुए हम इसी तरह तीन महिना बीत गया।
 इस बीच ना तो वो लोग फोन किया नाही लेने आया जब मेरे पापा वही का मुखिया सुरेन्द्र यादव को फोन किये जो पहले भी मेरा फैसला किया था तो वो बोला की ठिक है। आप यहाँ आ जाइये दोनों पक्ष से बात हो जाएगा मेरे पापा और चाचा जब वहाँ गए तो वो लोग फैसले का तारीख 10 जून, 2014 को देकर भेज दिया जब। 10 जूलाई को हमलोग वहाँ गए तो पाँच लोग बोला कि फैसला का खर्चा दोनों तरफ से यहाँ रख दिजीए पाँच-पाँच हजार मेरे पापा बोले की मेरे पास उतना पैसा नही है। हम पाँच सौ रुपया दे सकते है। तो वो लोग मेरे ससुराल वाला से बोला की ठीक है। आप अपना 2500 हजार और इनका 2000 हजार यहाँ रख दिजीए आखिर इनका दहेज आप वापस करियेगा तो मेरा ससुराल वाला वहाँ पर पैसा रख दिया तो पाँच हजार मेरे पापा से उन लोगों से आप बोलिये क्या बोलना चाहते है जो पहले उसे खत्म करिये हम दोनों पक्ष का बात करते है। लड़का लड़की को रखना नही चाहता और लड़की यहाँ रहना नही चाहती और साथ में यह भी बोला कि आपको कितना पैसा चाहिए वो बोलिए तो मेरे पापा बोले कि हम लड़की को नही छुड़ाना चाहते है।
हम यह बात सुने तो हमें रोना आया और हम रोने लगे। आखिर यह सब क्या हो रहा था। मेरी ही आँखों के सामने मेरे ही जिन्दगी का फैसला हो रहा था और हमें कुछ बोलने का इजाजत है। शादी को लेकर मेरा बहुत सपना था वो सब ख़त्म हो गया और यह सब टुटते देख मैं बहुत रोयी थी। मेरे पापा पर समाज वाले दबाव दे रहे थे कि रिश्ता खत्म कर लो वही अच्छा रहेगा ये सुधरने वाला नही और सब फाइनल हो गया पर मैं उसी घर में रहना चाहती है। क्या मेरा जीवन खिलौना है कि आज इसके साथ कल किसी और के साथ रहूँगी।
मैं चाहती हूँ कि जैसे भी मेरे पति को सुधारा जाये। मैं उन्ही के साथ रहुँगी। उस मुखिया पर कार्यवाही हो जिसने मेरे रिश्ते को तोड़ने की कोशिश की है। हमको यह सब सुना कर दिल हल्का लग रहा है और उम्मीद जागा है।
साक्षात्कारकर्ता - ओंकार विश्वकर्मा  व बंदना                                   
संघर्षरत पीड़िता- पुष्पा देवी
    





जिससे माँगा न्याय, उसी ने उलझा दिया हमें!!

जिससे हमारा समाज कठिनायां के दबाने का काम सदियों से करता आया है, और बड़ी तरह के आरोपो को कद मढ़ कर बदनाम किया है। समाज के साथ-साथ रक्षक भी भक्षक बन गये है। इसी तरह की एक घटना है जो बता रही है राघा देवी अपने बयान में।
मैं राधा देवी पति श्री बासुदेव शर्मा ग्राम-पचमा, पोस्ट-बासोडीह प्रखण्ड, थाना-सतगवां जिला-कोडरमा की मूल निवासी हूँ।
मेरी घटना यह है कि मेरे पति बहुत अच्छे थे। जब हम लोग शादी किये थे, पुरा माहोल खुशनुमा था। पुरा जीवन खुशहाल था पर मेरे पडोसियों को मेरी खुशी रास नहीं आयी और वे लोग हमारे पति से तरह-तरह की बाते करने लगे। अचानक हुआ यह कि मेरे पति हमें मारने-पीटने व गाली-गलौज कर हर तरह से प्रताड़ित करने लगे। 2010 में मेरे पति हमें चेन्नई से सतगागवां कोडरमा ले आये और यहाँ भी हमें प्रताड़ित करने लगे मेरी तीन बेटी और एक बेटा है। मेरा बेटा मेरे पति के साथ चेन्नई में रहता है, और मेरी बेटी सब मेरे साथ रहती है। मै पति के प्रताडना से तंग आ गई हॅू। हाल ही में 6 सितम्बर 2012 की मेरे पति चेन्नई से आये थे। तब भी सब ठीक था। 7 सितम्बर को मेरे पति मेरे चचेरे ससुर रामवचन मिस्त्री दोनो शराब की बोतल ले कर मेरे घर पर आये, और बैठ कर दारू पिये। इसी बीच मेरी चचेरी सास मीना देवी भी आ गयी, और मेरे घर का दरवाजा बंद कर दी। हम पूछे काहे बंद कर रहे है बोली अभी पता चल जायेगा। तो मेरे दोनों हाथ पकड़ ली, और मेरे पति व मेरे चचेरे ससुर बास का मोटा डंडा लेकर हमें मारने और पीटने लगे। मैं पूरे आँगन में लेटने लगी और मार से मेरा हाथ टुट गया। मेरा पूरा शरीर फुल गया। मै पूरी तरह बेहोश हो गयी। यह देखने के बाद भी मेरे पति हमें मारते रहे, मेरी बड़ी बेटी को भी मार-मार कर हालत खरब कर दिया। हमें बेहोश देख कर मेरी बेटी ने छत पर चढ़ कर ईटा उठा ली, और बोली की मेरी माँ को छोड़ो तब जा कर मेरे पति हमे छोडे। मैं किसी तरह अपने आप को सम्भाली और लग रहा था कि हम मर जाये पर क्या करे बेटी को कैसे छोड़ सकते है। इस लिए हम रिक्सा ले कर थाने गये वहाँ एफ0आई0आर0 दर्ज करवाने के लिए। बड़ा बाबू हमको देख कर बोल रहा था कि कौन तुम्हारा यह हाल किया है हम साले का टाग तोड़ देगें। उसके इस बात से ऐसा लग रहा था मानो मेरा सब कुछ सही है यह सुनकर हमको ऐसा लगा कि यह मेरे साथ इंसाफ करेगें और उन्होंने पूरा कार्यवाही की इंजोरी रिपोर्ट वगैरह सारा चीज बनवाये और फिर हमको घर छोड़ दिये, पर मेरे केस में कोई कार्यवाही नहीं किये। बड़ा बाबू हमको फोन किये और बोले बेटी को लेकर थाने आव फिर हम अपनी मझली बेटी को लेकर थाने गये। बड़ा बाबू सफेद कागज पर हस्ताक्षर करवा रहे थे। हम मना किये तो बड़ा बाबू हमको समझाने लगे कि दो लोगो को छोड कर अपने पति पर ही केस करो।
हम गुस्सा से उनके केस नम्बर लिए और कोर्ट में आवेदन बनाकर एस0पी के लिये तो एस0पी0 ने डी0एस0पी0 को भेज कर मेरे केस का जांच करवायी जा। कुछ समय बाद बड़ा बाबू साफ बोल दिये कि हम कुछ नहीं किये। हम मना भी नही किये है, और यह बोल कर साफ निकल गये।
फिर बड़ा बाबू कई बार हमें फोन कर बोले कि राम बचन को देखेगी तो हमे फोन करना। हम कई बार फोन किये पर बड़ा बाबू राम बचन का फोन नहीं लगा। इस तरह से हम परेशान हो गये। 26 मार्च को मेरे पति चेन्नई से आये, और दारू शराब पीकर गाली गलौज करके हमको मारे और घर के दरवाजा और खिडकी तोड़ दिये। हम तुरन्त बडा बाबू को फोन किये तो बड़ा बाबू पूछ रहा है। हम तुम्हारी बेटी के बारे में कुछ सुन रहे है। वे औरत बोल रही थी। हम बोले कि हमारे घर में मेरे पति मेरा दरवाजा तोड़ रहे है, और आपको मेरे बेटी को गलत साबित करने की चिन्ता लगी है। इस तरह दो तीन बार हम उनको फोन किये। जब मेरे पति दरवाजा तोड़ने की कोशिश करते हम फोन करते तो वो हमे इसी तरह का बात बोले कर दर किनारे कर देते। इस तरह हम तंग आ गये है और मेरे पति लगातार पागल की तरह हमे बीच रोड पर खड़ा होकर गाली देते है कहते है हम एस0 पी0 डी0 एस0 पी0 सब को खरीद लिए है। देखगें तुम कहा-कहा केस करेगी। हमको कुछ नहीं होगा। थाने की लापरवाही व कार्यवाही से उदासीनता को देख कर हमे लग रहा है कि अब हमें न्याय नहीं मिलेगा। थाना प्रभारी भी गलत तरिके से पेश आता है, उसके पास जाने का मन नहीं करता पर क्या करे कानून का रखवाला जो बन बैठा है जाना पड़ता है पर न्याय की उम्मीद से नहीं सुरक्षा की उम्मीद से जाते है कि कही कुछ तो सुरक्षा मिले।
मैं चाहती हॅू कि मेरा पति सुधर जाये और वो ठीक ढंग से मेरे साथ रहे और नहीं सुधरता है तो मेरा जो हम अधिकार है वे हमे मिले। आपके पास आये है। अपनी घटना आप को बता कर हमको लग रहा है कि हमको न्याय मिलेगा। हम बड़ी उम्मीद से आपके पास आये है।

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हमे बहुत दुखः हुआ जब समाज के लोगों ने मेरा रिश्ता तोडा

मै करुणा रानी, उम्र 24 वर्ष पिता श्री सुमन लाल मेहता, ग्राम बेहराडीह, पोस्ट बेहराडीह थाना-डोमचाँच, जिला-कोडरमा, झारखण्ड की मूल निवासी हूँ। मै वर्तमान मे पढाई कर रही हूँ।
 मेरी घटना यह है कि जब मै छोटी थी 12 से 13 साल की थी। तब हमारे समाज मे कोई शादी होती थी तो मै किसी शादी में शामिल नहीं हो पाते थी और घर वाले जाने भी नही देते थे। कारण यह था कि मेरे पिताजी समाज के गलत कार्यो का विरोध करते थे। तभी से हमारे पापा के विरोध में पुरा समाज था। और यही कारण था कि हमें किसी भी व्यक्ति के यहाँ हो रहे शादी विवाह या अन्य कोई समारोह में जाने नहीं दिया जाता था। मन में बहुत से सवाल उठता था। पर उस समय हम किसी से कुछ पूछ भी नहीं सकते थे, कि हमें क्यों नहीं जाने दिया जाता था। हम लोगों को पूरे कमरे में बंद रहना पडता था। और इसी तरह कई साल गुजर गये और मै बडी हो गई। अब मेरी शादी की बात आनें लगी। बचपन से लेकर आज तक इस समाज के अन्याय को मै झेलते आ रही हूँ। और आज उस समाज का काला चेहरा भी मेरे सामनें आ गया। जब मेरी शादी तय होने लगी, तो मेरा पहला शादी बोकारो में तय हो गया था। उस समय मै एम0 बी0 ए0 कर रही थी। उस समय मेरी शादी तय होने को लेकर मेरे घर में सब खुश थे। मेहमान लोग हमे देखने आये थे। और हमें देखने के बाद वो लोग हमें पसंद कर लिये थे। खुशी मानों दुगनी हो गयी थी। पर ना जाने वो मनहुस दिन आया कि वो लोग फोन करके कह दिये कि, हम शादी नहीं करेंगे।
जब ये बात हम सुने तो हमें भी झटका लगा कि पापा इतना मेहनत मजदूरी करके हमें पढा रहे है। और मेरा घर बसाने के लिये एक कोशिश किये वो टूट गया। पर इस विश्वास से आगे बढे कि कुछ तो नया होगा पर हर बार यही होते रहा। मेरा रिस्ता लगता और सब कुछ हो जाने के बाद टूट जाता था। हमें समझ में नही आ रहा था कि आखिर एैसा हो क्यों रहा है। इसी तरह मेरा रिश्ता फिर घोडथम्भा में लगा तब सब बात तय हो जाने के बाद, वही बात सामने आया कि हम जाती समाज से अलग है। इस कारण मेरा रिश्ता ये जाती समाज के लोग शादी नहीं करने देते हैं जहाँ तक हमको पता चला कि मेहता जाति के प्रधान लोग वहाँ जाकर लडके के परिवार वालो को धमकी दिये और ये कहकर आये कि आप सुमन मेहता कि बेटी से अपने लडके का शादी नहीं कीजिये। नही तो हम शादी नहीं होने देंगे। जब हमें पता चला तो हमें लगा कि दुशमनी या फिर जो कुछ है मेरे पिताजी से है। ये जाति समाज के लोग मेरा जिंदगी खराब करने के पीछे क्यों पड गये है। यह सब कुछ सुनने और होने के बाद हम खुद ही किसी के यहाँ आना जाना छोड दिये थे क्योकि हमें ईस बात का पूरा विश्वास था कि हम अगर उस शादी में गये तो मेरा सम्मान को ठेस पहुचेगा| इस कारण नहीं जा पाते पर जानें का मन पूरा रहता था। हाल ही में पूरा घर परिवार व आस-पडोस के लोगों को धमकी दिया गया कि जो लोग सुमन लाल मेंहता कि बेटी के शादी में शामिल होगें तो उस पर समाजिक कार्यवाही की जायगी। और फिर आपके बेटा बेटी कि शादी में समस्या आयगी। फिर देखेगें कि आप अपने बच्चों का शादी कैसे करेगें। यह सुन कर हमे बहुत दुखः हुआ कि ये समाज है या कसाई। जो किसी के मजबुरी को ना समझ कर उसके दामन में दाग लगाने की कोशिश कर रहा है। समाज व्यवस्था बनाने का तरिका है। व्यवस्था तोडनें का नहीं। हम समाज का सम्मान करते है। पर इस समाज के जो ठेकेदार है वो किसी गरीब कि बेटी का जीवन नहीं खराब करें। ये बुरा है हम एैसे लोगो के खिलाफ है। समाज के खिलाफ नहीं।

हम चाहते है कि जो समाज के ठेकेदार हो कर हमे और हमारे परिवार को तबाह करने की कोशिश कर रहा है। कानून एैसे लोंगों को सजा दे और हमे न्याय। 

साक्षात्कारकर्ता - ओंकार व वंदना देवी                        
संघर्षरत पीडिता - करुणा रानी

मेरी माँ की गरीबी के कारण मेरी जिन्दगी बर्बाद कर हो गयी!!

मै काजल देवी उम्र 18 वर्ष पिता मनी राम रजक ग्राम माथाडीह, पोस्ट डोमचाँच, जिला- कोडरमा, झारखण्ड की मूल निवासी हुँ।
मेरी घटना यह है कि मेरी माँ मेरी शादी एक वर्ष पहले वर्धमान में लगाई थी हमको लड़का पसंद नही था हम माँ से बोले कि हमको लड़का पसंद नही है हम यहा शादी नही करना चाहते तो मेरी माँ बोली कि अगर तुम यह शादी नही करोगी तो हम तुम्हारी शादी राजस्थान की तरफ कर देगे क्योकि मेरे पास उतना पैसा नही हम मजबुर होकर यह शादी के लिए तैयार हो गए| मेरी शादी दिनांक 9 मई 2014 को बर्धवान में योगेश रजक के बेटे ओम प्रकाश रजक के साथ हो गई, शादी के दिन हम बहुत रोएं हमको लगा कि मर जाए लेकिन यह शादी नही करे। शादी हर लड़की का सपना होता है लेकिन मेरा सपना टूट गया। जिससे मेरी शादी हुई वो उम्र में मुझसे बहुत बड़ा था।
जब हम ससुराल गये तो मेरे पति मुझसे पार्टी वाले दिन बहुत जोर जबरदस्ती करने लगे और जब हमने मना किया तो मेरे माँग का सिन्दुर मिटा दिये और चुड़ी तोड़ दिये, मंगलसुत्र भी तोड़ने जा रहे थे किसी तरह मैने अपने आपको सम्भाला उन्होने मुझे गाली दिया और वहाँ से भाग जाने को कहा उस दिन हम बहुत रोए और सबकुछ सहन करके किसी तरह एक महिना का समय काटा। एक महिना बाद हम अपने मायके आ गए और मम्मी को सारी बात कही। दो दिन बाद मेरे पति मुझे ले जाने को आये मेरी माँ भी मुझे जाने को कह रही थी, उस दिन मैने जाने से मना कर दिया इस पर खुब झगड़ा हुआ तब मेरी माँ भी साथ जाने को तैयार के लिए तैयार होने लगी। मेरे पास 900 रुपये थे वो पैसा माँ ने माँग लिया और जब मैने पैसा माँगा तो नही दिया तो मैने कहा बिना पैसे के हम नही जाऐंगे इतने पर मेरी माँ मुझे मेरे पति के सामने ही मारने लगी और गाली दी मुझे बहुत खराब लगा और गुस्से के कारण मै घर से 900 रुपये लेकर बाहर निकल गयी| मेरी माँ ने मुझे बहुत खोजा पर हम शाम को खुद वापस आ गए। जिस दिन वापस आए माँ ने मुझे खुब मारा और एक आदमी है नन्तु बंगाली उसके बारे में कहने लगी कि वही तुमको ले गया था और तुम्हारा एक लड़के से गलत संम्बंध है जबकि ऐसा कुछ भी नही है। यह सब सुनकर मै गुस्से से पागल हो गयी और अपने हाथ कि नस काट ली और नींद की 10 गोली खा लिया क्योकि अब जीने कि इच्छा नही थी। इतना सबकुछ होने के बाद भी हम अपने ससुराल गए। यहाँ मेरा पति मुझे आये दिन मारता और जलील करता था। वह कहता कि इस कागज पर अपने साइन कर दो हमे तलाक चाहिए तो मै उसे कहती तुम मेरी माँ से कहो तो कहता मै नही कहुँगा। मुझे डर था कि वो कही साइन करवा कर मुझे मार न डाले। कुछ दिन बाद मै अपने पति, ससुर, और ममिया ससुर के साथ मायके आ गई। यहाँ से हम फिर ससुराल नही गए। एक महीना हो चुका है। मेरी माँ कहती कि मैने तुम्हे बर्बाद कर दिया। दुसरी शादी करने को कहती है लेकिन हम कुछ काम करना चाहते है। फिर कुछ समय के बाद सोच समझ कर शादी करेंगे।
आपको अपनी बात बता कर बहुत हल्का महसुस कर रहे है। हमको विश्वास है कि हमको न्याय जरुर मिलेगा।

 साक्षात्कारकर्ता- ओंकार,   वन्दना देवी

 संघर्षरत पीड़िता -गुलाबी देवी                   
                                                                                            


बेटे ने घर से निकाल दिया, पुलिस नहीं सुना!!

मैं गुलाबी देवी पति श्री रामेश्वर दास ग्राम-चैनपुर, पोस्ट-डोमचाँच, थाना-कोडरमा की मूल निवासी हॅू।
मेरा पूरा परिवार खुशहाल था जब मेरे पति का नौकरी था। उस समय सब ठीक था पर जब मेरे पति बडे़ बेटा की नौकरी दे दिया। तब मेरा बड़ा बेटा हमको बोला कि माँ हम तुमको ठीक से रखेगे। तुम्हें कोई तकलीफ नहीं देगे। लेकिन नौकरी होने के बाद मेरा बडा बेटा बदल गया। हमको घर में रखा पर खाना पीना बाहर में देता था। कही आने जाने व घुसने नहीं देता था। जब यह बात मै अपने पति से कहती तो वो कहते कि हम बड़ी बहू को खिलायेगे। तुमको काहे खिलायेगे। तुम बच्चा पैदा नहीं करेगी और मेरे पति और मेरी बहू हमेशा दोनो अन्दर में रहते। क्या पता भगवान जाने क्या करते थे। मेरा बडा बेटा नौकरी के दौरान बाहर रहता और इधर घर में मेरी बडी बहु अपने मन से जो आता तो करती जब मैं कुछ बोलती तो हमे बहुत मारती| इस बात को जब मेरा बडा बेटा आता हम उसे सुनाते तो वो भी हमें बहुत मारता और कहता कि तुम मेरी पत्नी को बदनाम करती है और यह कह कर मारता था और कहता था कि मेरी पत्नी को इस तरह का क्यों बोलती है और यह कह-कह कर हमे लगातार मारते पीटते रहा इस मारपीट से तंग आ कर मैं थाने गई थाना से भी कोई सुनवाई नहीं हुआ और फिर कुछ दिन में मेरा बेटा वाहर चला गया। मै अपने छोटे बेटे के पास रहने गई तो वो भी हमें गाली गलौज करता कहता कि  नौकरी उसे दे कर मेरे तरफ खाना खाती है पर हम क्यों खिलायेगें। तो हमे बडे बेटे की तरफ ही भेजता। इसके तरफ इसकी पत्नी हमे मारती पीटती और बहुत खराब-बराब गाली देती थी हम घर के बाहर बैठे रहते थे। और मेरे घर के अन्दर मेरे पति रहते और गाँव एक और आदमी पुनीत दास आते जाते रहता था। 
हमे समझ में नहीं आता कि वह क्यों मेरे घर जाता है। लेकिन एक दिन पुनीत दास मेरे सामने मेरी बड़ी बहू और बेटा के सामने यह कहता कि इस बुढ़ी को काहे रखते हो भगाव इसको इस घर में नहीं रहने दो। हमको सब मिल कर भगा दिया। तब बड़ा बेटा भी हमको कुछ नहीं बोला और हम दुसरे घर में चले गये और वहाँ रहने लगी। और भीख माँग कर खाने लगी। भीख माँगने से जो पैसा 100 रूपया व 50 रूपया रहता वो मेरा बडा बेटा मेघलाल मेरे घर से चोरी करके ले जाता था। मैं परेशान हो गई उस घर में मेरा जो बर्तन बगेरा था सब ले गया। इस तहर दो से तीन बार मेरे पर में बड़ा बेटा ही चोरी किया। यह सब देख कर मेरा बुरा हाल हो गया मैं तंग आ गई। यह कैसा बेटा है  मेरा बेटा मेरे पति को अपने साथ रखता है इस लिये कि उसका नौकरी था और कुछ नहीं क्या मेरे पति के पैसे पर मेरा कोई अधिकार नहीं यह सब सोंच कर मैं रोते रहती थी।
वर्तमान में मैं दर-दर की ठोकर खा रहा हॅू। बड़ा बेटा भी हमको नहीं पूछता और छोटा बेटा भी नहीं पूछता अकेले जंगल में रहती हॅू। और भीख माँग कर गुजर बसर करती हॅू।
मैं चाहती हूँ कि मेरे घर में हमें एक कमरा मिले और मेरा बड़ा बेटा जो मेरे पति को नौकरी लिया है वह हमें 1000/(एक हजार रूपया) महीना हमें दे और मेरे घर को बर्वाद करने में जिस पुनीत दास का हाथ रहा है जो मेरे सामने यह बोला कि इस बुढ़ी को निकालो उस समय हमे बहुत तकलीफ हुआ था। मैं चाहती हूँ कि उसे सजा हो ताकि उसे भी पता चले कि तकलीफ क्या होता है।

साक्षात्कारकर्ता - ओंकार विश्वकर्मा,    वन्दना देवी
संघर्षरत पीड़िता - गुलाबी देवी