Friday, 30 October 2015

जमीन के कारण ले ली महिला की जान !

आज भी दबंग व्यक्ति पैसे व गुण्डई के बल पर गरीब कमजोर व्यक्ति को हमेषा सताने व फर्जी केस में फसाने तथा जान से मारने का ठेका ले रखा है और कानून को खिलौना समझने लगे है क्योकि कानून के रक्षक भी उन्हीं की सुनते हैं वे भी चन्द्र पैसा की लालच में अपने वर्दी को बेचकर कानून का उल्घन करते है। आइए ऐसी हकीकत स्व व्यथा कथा पीडि़त की जुबानी से सुने।
    मेरा नाम राजेश सरोज उम्र 28 वर्ष मेरे पिता का नाम महादेव ग्राम-मरही] पोस्ट-सेवसीपुर] थाना- जलालपुर] जिला-जौनपुर का रहने वाला हूँ। मेरे परिवार में दो भाई एक बहन व मेरी पत्नी, पिता, और मेरे तीन बच्चें रहते है। हम लोगो का परिवार बहुत खुल था मै मेहनत मजदूरी का काम करता हूँ हमारे घर के परिवार मुन्ना की पत्नी को जिसका नाम पूनम है। उसे दिनांक 1 जुलाई 2014 को पास के दबंग व्यक्ति रामाश्रय पुत्र विदेशी सरोज अजय, विजय, संजय पुत्र रामश्रय को मारने लगे और बोल रहे थे कि अपने पति को काम करने वाहर क्यों भेजी उस समय वह महिला थर--थर कांप रही थी और जोर-जोर से रो रही थी। उसकी दशा देखकर हम लोग उस महिला को बचाने के लिए गये और उस महिला को छुडाये जिसका परिणाम कि उसी रंजीस को लेकर दबंग हम लोगों को प्रताडि़त करते रहे। यहा तक कि दबंग व्यक्ति मुझे व मेरे परिवार को जान से मारने की धमकी दिया।
 हम लोग उसकी धमकी के डर से पूनम के साथ पराउगंज चौकी पर गये वहा मेरा रिर्पोट लिखा गया। लेकिन पुलिस द्वारा कोई कार्यवाही नहीं कि गयी। पुलिस उन दबंगो से मिली हुई थी। उधर मैं चौकी पर बैठा था कि 1 जुलाई, 2014 को मेरे घर के वगल में जो उमासिंह की जमीन थी उसी को लेने के लिए दबंग व्यक्ति व मेरे परिवार से पूरानी रंजीश चल रही था जो जमीन की कीमत मेरे परिवार द्वारा एक लाख बीस हजार रुपये में तय था लेकिन दबंग व्यक्ति रामाश्रय सरोज उसी मजीन को लेने के लिए सामने वाले एक लाख पचास हजार रुपये में तय किये उस समय हम लोग पैसे के आभाव में जमीन को छोड़ दिये लेकिन दबंग व्यक्ति हमारे परिवार को बार-बार गाली गलौज झगड़ा, मार-पीट करता रहा और बोला की तुम गोलो को जान से मार दूगा। तुम लोग पूनम को लेकर पराउगंज चौकी पर गये थे वह झगड़ा एक 1-7-2014 को सुबह में हुआ, उसी समय में पूनम को लेकर चौकी पर गया था। वहा कि पुलिस रिर्पोट तो लिखना दूर हमको भद्दी-भद्दी माँ-बहन की गाली देकर मुझे चौकी पर 3 घण्टा बैठाया था। उस समय पुलिस की रवैया को देखकर मुझे डर लग रहा था मन घबरा रहा था मेरे घर से 8:20 मिनट शाम को फोन आया कि दबंग व्यक्ति रामाश्रय व उनके लड़के के साथ चनुआ शट्टी छित्तुपुर से गुण्डा किस्म में व्यक्ति जिया लाल सरोज पुत्र-कल्लू सरोज अपने कुछ साथियों के साथ मरही गाँव में आया जो दबंग व्यक्ति के रिश्तेदार थे ये व्यक्ति अपनी बाईक भगवती सिंह के आज के बगीचे में खण्डा किये थे जो गाँव से थोड़ा दूर या दबंग व्यक्ति के घर पैदल आया वहाँ लोग दारु पीकर पूनम को मारने लगे पुनम जोर से चिल्लाने लगी और जान बचाने की गोहार लगाने लगी किसी प्रकार दबंगो के चंगूल से बचकर हमारे घर भाग कर आयी|
 उस समय मेरा छोटा भाई राकेश चचेरा भाई सुनील मौके पर मौजूद थे। पूनम को बचाने आये तो दबंग व्यक्ति धार दार हथियार से लैस और मेरे भाई को गुप्ती चाकू चैन से बार करने लगे जिससे मेरे भाई को पेट पीट फेफडे में तीन जगह जान लेवा हमला किये जिससे व धायल होकर जमीन पर गिर गया उस समय मेरी माँ दुलारी देवी मौके पर गयी और बेटे की दशा देकर रोने चिल्लाने लगी और उन गुण्डो के पैर पकड़कर अपने बेटे की जान की दुहाई भागने लगी लेकिन वह निर्दयी पापी मेरी माँ की बातो की नही सुने शराब के नशे में धूत मेरी माँ के पेट में गप्ती व चाकू से मारने लगे मेरी माँ छटपटाकर जमीन पर गिर गयी उसका पूरा लाद बाहर निकल गया पुरा शरीर खुन से लथपथ था मेरी माँ कुछ कहती इसके पहले ही मेरी माँ कुछ कहती मौके पर ही उसकी मृत्यु हो गयी|
 उस समय पुलिस मुझे चौकी पर बैठाये रहे अगर पुलिस वाले हमे नहीं बैठाये होते तो मेरी माँ की हत्या न हुई होती | हमारे भाई को चाकू गुप्ती लगी उधर जब मैं अपने घर आया तो वहाँ हालात को देखकर मैं आवाक हो गया मेरे पैर से मानव जमीन खिसक गयी मैं माँ की लाश से लिपट कर रोने चिल्लाने लगा मुझे कुछ दिखाई नही दे रहा था| लेकिन किसी प्रकार अपने आपको सम्भालते हुए लोगों को समझाये इधर दबंग व्यक्ति मारने के बाद पराउगंज पुलिस चौकी पर पहूँचे उल्टा आवेदन मेरे खिलाफ दिये कि राजेश सरोज व उसके परिवार वाले मुझे बहुत मारे पीटे तब पुलिस वाले उन दोनों व्यक्ति को बैठा लिए उनके खिलाफ कोई कार्यवाही न करते हुए उन्हे छोड़ दिये| घटना की सूचना मेरे परिवार वाले 100 नम्बर डायल करके पुलिस को दिये थे और 108 नम्बर डायल करके एम्बुलेंश बुलाया गया उस गाड़ी से अपनी माँ व भाई को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र जलालपुर गये जहाँ डाक्टर द्वारा मेरी माँ को मृतक घोषित कर दिया गया और मेरे भाई को राजकीय चिकित्सालय रेफर कर दिया गया पुलिस प्रशासन के दरोगा बीएचयू भर्ती कराने की राय दिये मेरा भाई उस हास्पिटल में 15 दिन भर्ती रहा जो सात दिन कोमा में था आठवे दिन उसे होश आया उसका आपरेशन 14 सेमी में किया गया था। हम लोग भाई को अपने से दूर उसके ससुराल में रखे है मेरे भाई को यह पता नही था कि मेरी माँ मर चुकी है मै रिन कर्ज लेकर अपने भाई के इलाज में 3 लाख रुपये लगाया|
 दबंग व्यक्ति से आज भी हम लोगों को डर व भय है। एक दिन दबंग व्यक्ति मोबइल नम्बर 7817996654 नम्बर से फोन करके माँ बहन की भद्दी-भद्दी गाली व जान से मारने की धमकी दे रहे थे और कहते थे कि अभी एक हत्या हुई है। मैं तुम्हारे परिवार को मौत के घाट उतार दूंगा पुलिस वाले हम लोगों के साथ जातियता किये और दबंग व्यक्ति से मिलकर पैसे के बल पर लोगों को गाली देते थे ऐसी पुलिस व दबंग व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो ताकि ये व्यक्ति किसी दूसरे के जीवन से खिलवाड जा कर सकें। आज भी घटना को याद करता हूँ तो पूरे रोगते खडे हो जाते है। रात में नींद नहीं आती भूख नहीं लगती। घर में बराबर चिन्ता बनी रहती हैं दबंग़ व्यक्ति से डर बहुत लगता है माँ की बहुत याद आती है।
    आपको अपनी बातो को बताकर हल्कापन महसूस कर रहा हूँ।
साक्षात्कारकर्ता - दिनेंश कुमार अनल और प्रभाकर
संघर्षरत पीडि़त - राजेश सरोज
                        

Thursday, 29 October 2015

ससुराल द्वारा मेरी बेटी को प्रताड़ित किया गया व दहेज न देने पर भगा दिया गया।

आज भी हमारे देश में महिला की जिन्दगी को वर्बाद करने में जरा सी भी संकोच नहीं करते। उन्हे अपमानित करना उन पर हसना पुरुषों की आतद है आइये एक ऐसी ही पीड़िता की कहानी उसी के जुबानी से सुने।
            मेरा नाम अमरावती देवी उम्र 60 वर्ष मेरे पति का नाम मूलचन्द्र मुसहर ग्राम-थानेरामपुर, पोस्ट-थानेरामपुर, थाना-फूलपुर, तहसील-पिण्डरा, जिला-वाराणसी की मूल निवासी हूँ। मै अपनी लड़की की शादी ग्राम-खुर्द पसिपाही, पोस्ट-कठिराव, थाना-नेवढिया, जिला-जौनपुर में दिनांक 9 दिसम्बर, 2009 को पूरे हिन्दू रीति-रिवाज के साथ किये थे। जो कुछ हो सका हम उन्हे दिये। शादी के बाद कुछ दिन तक सब कुछ ठीक-ठाक था मेरी बेटी जब दोवारा ससुराल गयी तो मेरे दामाद धर्मेन्द्र व सास शान्ति देवी द्वारा हमारे बेटी को बात-बात पर मार-पीट कर घर से निकाल देते थे कि तुम अपने माँ-बाप से सिकड़ी, अगूठी माँगकर लाओं तभी तुमको रखेगे | यह सब मेरी बेटी सहती लेकिन कभी हम लोगो से नहीं कहती थी एक बार मेरी बेटी को बहुत मार दिये थे| हमारी बेटी हमारे घर थानेरामपुर आयी तो कुछ दिन मेंहनत मजदूरी करके खिलाये इसके बाद सिपा बीबी के घर पंचायत हुआ कि हमे सिकडी अगूठी नही चाहिए आप लड़की का विदाई कर दिजिये फिर मै पंचायत की बात मानकर फिर हम लोगो ने अपनी लड़की विदाई कर दी ससुराल जाने के बाद मेरी बेटी को धर्मेन्द्र व उसकी सास शान्ति देवी द्वारा मार-पीट कर घर से भगा दिया गया। उस समय मेरी बेटी रोते हुए त्रिलोचन की तरफ चली गयी उसका दिमाक काम नहीं कर रहा था तो वह भठ्ठा पर जा रही थी। 
       तभी उसे देखकर एक औरत अपने घर रख लिया और जब मेरी लड़की की लापता की सुचना मिली तो मै खुर्द पसिपाही गयी तो वह लोग बोले की तुम्हारे लडकी यहा से भागकर तुम्हारे घर गयी है तुम लोग छिपा कर रखे हो यह सूनकर मै रोते हुए वापस घर आने लगी। पास में पैसा भी नहीं था कि गाडी पकडकर अपने घर आ जाऊ किसी तरह पैदल अपने घर आ गयी आयी शाम हो गया था रात में नीद आ रही थी कि मेरी बेटी कहा होगी कही मेरी बेटी को मार तो नहीं दिये|गयी यहो सोचते-सोचते सुबह हुआ तो मै फूलपुर थाने पर गयी तो वहा से पुलिस वाले मुझे कठिराव पुलिसचौकी पर भेजे पुलिसचौकी पर जाकर मै आवेदन दिए तो दो पुलिस वाले मेरे साथ खुर्द पसियाही मेरे दामाद के घर गये तो मेरे दामाद धर्मेन्द्र सास शान्ति घर पर नहीं मिलें।
सुबह कठिराव पुलिसचौकी पर गये तो पुलिसचौकी के दिवान ने कहा कि खुर्द पसिपाही नेवढ़िया थाना अन्र्तगत अंतर्गत अन्तरगत\आता है तुम नेवढ़िया थाने पर जाओ नेवढ़िया थाने पर गये तो वहा तैनात दरोगा पुलिस वाले बोले कि तुम्हारी लड़की का किसी से चक्कर रहा होगा इस लिए वह भाग गयी होगी पर कहते हुए पुलिस वाले मेरे लड़की की शादी का कागज को फेककर बोले चलो जाओं यहाँ से वहा तो ऐसा होता है हम लोग किससे-किससे जुझेगें। चलो भाग जाओ तब देा पुलिस वाले बोले दो हजार रुपये दो मै तुम्हारे दामाद को पकड कर लाऊगा तो तुम्हारी लड़की मिल जायेगी। मै बोली साहब बनी मजदूरी करके किसी तरह खर्च चलाते है मेरे पास इतना पैसा नहीं है तब पुलिस वालो ने कहा तब यहा क्यो आयी हो चलो भाग जाओ यह सुनकर मै सोचने लगी की गरीबो की सुनने वाला कोई नहीं है यही एक उम्मीद थी वह भी टूट गयी। 
सुबह हुआ तो दो सिपाही वाले मेरे घर आये और बोले की तुम अपना आवेदन लो जलालपुर जाओं तब जलालपुर थाने पर गयी तो जलालपुर के दरोगा ने कहा कि नेवढ़िया थाने पर जाओ यह हमारे थाने के अंर्तगत नहीं आता है तब मै फिर नेवढ़िया थाने पर गयी तो उमाशंकर सिपाही द्वारा कहा गया कि तुम अपनी लड़की को खोजकर लाओं तब कुछ होगा तब मै अपनी लड़की का पता कर रहे थे इसी बीच मेरी लड़की का पता चला कि हमारी लड़की जलालपुर ईट भट्ठा नेवादा में मिली उसे लेकर अपने घर गयी मेरी बेटी के पास एक लड़का है तै उसको बनी मजदूरी करके देख-रेख कर रही हूँ।
      मै आप को अपनी आपबीती बातो को बताकर हल्कापन महसूस कर रहा हॅू।

साक्षात्कारकर्ता -   प्रभाकर प्रसाद

संघर्षरत पीडिता - अमरावती देवी

Wednesday, 28 October 2015

दबंग व्यक्ति व पुलिस के मिली भगत से फर्जी केस में फंसे गरीब !

आज भी हमारे भारत देश की पुलिस दबंग व्यक्तियों से मिलकर गरीब दलितों को फंसाने का ढेका ले रखी है। आइये ऐसी ही एक पीडि़त व्यक्ति की स्व व्यथा कथा सुने उन्ही की जुबानी।
मेरा नाम भोला मुसहर उम्र-50 वर्ष मेरे पति का नाम दमडीं मुसहर मेरी पत्नी का नाम लालती देवी ग्राम-धरसौना, पोस्ट-चोलापुर, थाना-चोलापुर, तहसील-पिण्डरा, जिला-वाराणसी का मूल निवासी हूँ। मेरे आठ लड़के व एक लड़की है। जिसमें से 3 लड़का व एक लड़की की शादी कर दिया हूँ और 4 लड़के मेरे साथ रहते है। उन्हें लेकर मैं विजय दशमी के बाद से झोटा सिंह के भट्ठे पर निकबू मार्का ईट भट्ठे पर ईट पथाई का काम परिवार समेत करता था काम करके जो भी रुखी-सुखी मिलता था। वह खां पीकर कर अपने परिवार के साथ खुश थे कि दिसम्बर 2014 को दिन में 9 बजे झोटा सिंह के भट्ठे पर दो सिपाही आये और मुझे बुलाये। मैं डरते हुए हाथ जोड़कर कहाँ साहब क्या है तब एक सिपाही ने कहाँ तेरा क्या नाम है। हम अपना नाम डरते-डरते हुए भोला बताये तो एक सिपाही ने फोन करके भट्ठे से दूर खड़ी दो गाड़ी बुलाकर मुझे पकड़ लिये तब मैं कहाँ साहब भट्ठा मालिक के यहाँ चलिए मैं चल रहा हूँ। तब दो सिपाही ने माँ बहन की भद्दी-भद्दी गाली देते हुए मेरे गाल पर एक चाटा मारे।
उस समय मेरे आँख के सामने अन्धेरा सा छा गया मुझे कुछ नही दिखाई दे रहा था और दो सिपाही पकड़कर मुझे गाड़ी में जबरी बैठा लिये, तब भट्ठा मालिक भी मुझे नही छुड़ाया। तब पुलिस वाले मुझे लेकर थाने आये दिन भर थाने में बैठाये थे फिर रात में थाने में 2 रोटी सब्जी दिये कि भोला खा लो सुबह तुम्हारी विदाई हो जायेगी यह सुनकर मुझे और डर लगने लगा मैं डर के मारे रोटी भी नही खाया थोड़ी से पानी पीकर दिवाल के सहारे बैठकऱ सुबह होने का इन्तजार कर रहा था। रात में मच्छर भी बहुत काट रहे थे सुबह के इन्तजार में रात मानव पहाड़ जैसा लग रहा था। घर वाले की चिन्ता बराबर सताती थी कि मेरे बच्चे न जाने कुछ खाये होगे कि नही यही सोचते-सोचते सुबह हुआ तो दरोगा साहब ने कहा कि तुम लोग मंदिर की चोरी किये हो उसी के लिये तुम लोगो को बुलाया गया है। मैं बोला साहब हम तो अपने बच्चों के साथ ईट भट्ठे पर ईट पाथने का काम करता हूँ तब दरोगा साहब ने कहां माधर चोद साले दिन में ईट पाथते हो रात में चोरी करते हो यह सुनकर मैं डर के मारे काँपने लगा जैसे मेरे पैर से जमीन खिसक गयी हो दरोगा द्वारा हम लोगों का चालान करके कचहरी भेजा गया, जहाँ पर मेरे परिवार के पास पैसा व जमानत दार न होने के कारण जमानत नही हो सका तो मुझे चौकाघाट जेल भेज दिया गया। चौकाघाट जेल में मुझसे शौचालय की नाली व प्लास्टिक के थैले निकालना होता था जिस समय मैं पेशाब की नाली से हाथ डालकर थैले निकालते थे। बहुत तेज बदबू आती थी जब खाना खाने बैठते थे तो वहाँ भी बदबू आती थी। कुछ खाने का मन भी नही करता था परिवार व बच्चों की याद बहुत आती थी। मेरे बच्चे किस हाल में होगे, यह सोच सोचकर आँखों से आंसू रुकने का नाम ही नही ले रहा था, तभी एक कैदी आया बोला साले माधर चोद यहां नाटक कर रहा है, चल झाडू मार नही तो तुझे मारुगा यह सुनकर मैं डर के मारे झाडू लेकर सफाई करने लगा इसके बाद 1 माह 13 दिन के बाद मेरा जमानत हुआ पहला तारीख 1 अप्रैल,  2015 को पड़ा तो हम संजय हमारी पत्नी लालती तीनों साथ में कचहरी गये तारीख देखकर पाण्डेयपुर से विक्रम पकड़कर घर आ रहे थे, चोलापुर थाने के सिपाही 2 बजे चोलापुर थाने में गाड़ी से उतार लिये। हमको उतार कर थाने में ले जाकर सिपाही द्वारा कहा गया कि तुम लोग के ऊपर गैगेस्टर लगा दिया। फिर मुझे चौकाघाट जेल में शौचालय व झाडू लगाने का काम मिलेगा। मैं मन ही मन में सोच रहा था कि क्या अब मेरी जिन्दगी उस चार दिवारी में रहेगी पिछली बार का कर्ज अभी पूरा हुआ ही नही तब से पुलिस द्वारा मुझे फर्जी केस मे फंसा दिया गया। हम चाहते है कि जो मुझे फर्जी केस में फसाया है उसके साथ कानूनी कार्यवाही हो और उसे सजा मिले और हमें न्याय मिले।
हम अपनी बातो को बताकर हल्कापन महसूस कर रहा हूँ।

साक्षात्कारकर्ता - प्रभाकर प्रसाद                        
संघर्षरत पीडि़त- भोला मुसहर
                        


क्यों हम गरीब को झुठे केस में फसाती है पुलिस !


मेरा नाम रामू घसिया पुत्र - स्व0 छल लाल घसिया, उम्र-25 वर्ष जाति-आदिवासी (घसिया) हमारे पास 2 लड़की है, मैं ग्राम-रौप (घसिया बस्ती), पोस्ट-सहिजन कला, थाना-राबटर्सगंज, जिला-सोनभद्र का मूल निवासी हूँ।

घटना दिनांक 25 फरवरी, 2015 रात समय लगभग 1:00 बजे को हमारे गाँव के राजकरन घसिया की हत्या पशु तस्करों द्वारा की गयी। पता चला कि पशु तस्कर जंगल के रास्ते पशुओ को पकड़ कर जंगल के रास्ते से बिहार झारखण्ड में ले जाकर बेच रहे है। उसी समय राजकरन घसिया और बस्ती के लोग रात में पशु तस्कर को पकड़ने के लिए जंगल में गये थे। पशु तस्कर 5-6 की संख्या में हथियार से लैस थे, सभी पशु तस्करों से मिलकर राजकरन घसिया की हत्या कर दिये जो इस समय पुलिस की गिरफ्त में है। मैं व मेरा भाई और मेरा भतीजा उस समय काम करने के लिए डी0डी0 आहुजा कम्पनी इलाहाबाद गये हुए थे। जिससे हम गरीब अपना तथा अपने परिवार का भरण-पोषण कर सकें। जब हमलोगों को इस घटना की जानकारी हुयी तो हमलोग वापस अपने घर आ गये और अपने-अपने परिवार के साथ रहना शुरु कर दिये। दिनांक 8 मार्च, 2015 को दो पुलिस वाले एक मोटर साइकिल से हमलोगों के घर पर आ गये। हमलोगों की गैर मौजुदगी में हमलोगों के परिवार की महिलाओं को माँ-बहन की भद्दी-भद्दी जाति सूचक गालियां देने लगे। बोले कि लाला, नरेश, रामू को बोल देना कि उन लोगों के ऊपर हत्या के जुर्म में गुण्डा एक्ट का केस लगा हुआ है। सभी लोग कचहरी जाकर जमानत करा लो नही तो जेल जाओंगे। जब हमलोग इलाहाबाद से वापस आये तो हमलोगों के परिवार की महिलाये और बस्ती के लोगों से इस बात का पता चला तो हमलोग के होस उड़ गये। घर में हमारी बीवी, भाभी व पतोहू ये सब सारी बाते पता रही थी और रो रही थी। उन्ही लोगों को देखकर मुझे भी रोना आ गया। सभी लोग सोच रहे थे कि अब हमलोग क्या करें | किस तरह से अपना जमानत कराये, क्योंकि हम गरीब बेरोजगार किसी तरह से बनी मजदूरी करके अपना तथा अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे है।

 मेरे जेल जाने से मेरा परिवार दाने-दाने को मोहाल हो जायेगा और भीख मांगने की स्थिति पैदा हो जायेगी। यही सोचकर मै भी रो रहा था अगले दिन सुबह में मेरे भाई और मेरा भतीजा कचहरी गये और वहां पर वकील से मिले और अपने ऊपर लगे फर्जी गुण्डा एक्ट के बारे में जांच कराये परन्तु कुछ पता नहीं चला और हमलोग घर वापस आ गये। घर आने पर अपने परिवार को बताये कि वकील के पास गये थे परन्तु ऐसी कोई घटना का पता नही चला। 10-20 दिन बाद हमलोगों के बस्ती में एक गाड़ी पुलिस जीप से आयी और हमलोगो के परिवार को माँ-बहन की भद्दी-भद्दी जाति सूचक गाली व धमकी देने लगी और बोले कि लोगों को जल्दी गिरफ्तार करवाओं नही तो तुम लोग भी जेल जाओगी। तब हमलोग फिर अगले दिन कचहरी गये और वहाँ पर वकील से मिले तो पता चला कि हमलोगों के ऊपर हत्या के जुर्म में गुण्डा एक्ट लगा हुआ है। हम सभी लोग कचहरी से वापस घर आये तो परिवार के साथ हमलोगों का भी रो-रो कर बुरा हाल हो गया था। जब परिवार का मुखिया नही रहेगा तो घर का खर्च कैसे चलेगा। उस दिन हमारे घर में चुल्हा नही जला बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया था। हमलोगों का परिवार दाना-दाना के लिए तरस जायेगा। लोग भुखे मर जायेगे। यही सब सोचकर रो-रहे थे। उस समय आँखों से आँसू नही जैसे खून निकल रहा हो। मेरी पत्नी और बच्चें का रो-रो कर बुरा हाल हो गया था। हमलोगों को न भुख लग रही थी और ना ही नींद आ रही थी।

 मैं अपना जमानत कराने के लिए जमीन गिरवी रख दिया तो जाकर मेरा जमानत हुआ। कभी-कभी रात कर डर के मारे नींद नही आती। अब तो काम करने का भी मन नही करता हमेशा डर बना रहता है कि पुलिस वाले कब हमको जेल में ना डाल दे, यही ख्याल मन में हमेशा बना रहता है कि जब पुलिस वाले हमको जेल में बन्द कर देगे तो हमारे परिवार और बच्चों का क्या होगा। पुलिस वाले हमलोगो को फर्जी गाजा, शराब तथा हत्या के जुर्म में फसाकर बन्द न कर दे। पुलिस वाले हमलोगों को इज्जत से कब देखेगे तथा फर्जी धारा लगाना बन्द कर देगी। 

मैं ये सब बाते बताकर अपने शरीर से हल्कापन महसुस कर रही हूँ।

  साक्षात्कारकर्ता  - महेश कुमार गुप्ता $ पिन्टू गुप्ता                           संघर्षरत पीडि़त - रामू घसिया

गुनाह किया कौन सज़ा भुगत रहा है कौन !

हमारे देश में हर गरीब और दलित का हर रोज बिना गुनाह किये भी उन्हे सजा दी जाती है उन्हे तरह-तरह से प्रताडि़त किया जाता है। उन्हें कमजोर समझकर उनसे बर्बरता का सुलक किया जाता है। ऐसी ही कहानी एक पीडि़ता की जुवानी सुने।
            मै श्यामकली हॅू, मेरी उम्र 40 वर्ष है। मेरे पति बसन्त लाल हैं हम लोग बनी मजदूरी करते है। मेरे पति की चौराहे पर छोटी सी चाय की दुकान है। मै ग्राम-मोहद्दीनपुर, थाना-घुरपुर, ब्लाक-चाका, तहसील-करछना, जनपद-इलाहाबाद की मूल निवासी हूँ । यह बहुत अच्छा था। इस गाँव का मिसाल दिया जाता था। हम लोग कभी नहीं सोचे थे कि ऐसा कुछ होगा इस गाँव में जब यह घटना घटी तो हम लोगो को बहुत अफसोस हुआ किसने क्या किया किसकी क्या गलती थी इस बारे में मै नहीं जानती लेकिन अब जो हो रहा है वह गलत है हर लोग घर से भागे है सबकी रोजी-रोटी छिन गयी है। बच्चों की पढ़ाई का नुकसान हो रहा है गाँव में डर का माहौल में कौन अपने बच्चों को अकेला स्कूल भेजेगा। उस रात कि तरह कोई भी रात न आये हम लोग आस-पास के तीन चार लोग घर के बाहर सोये थे मेरी बेटी नन्दनी भी सोयी थी। रात के करीब बारह बज रहे थे। हम लोग नीद में नही थे। एैसी वारदात हो गयी थी कि चिन्ता लगी थी। तभी एक गाँव की औरत भागते चिल्लाते आयी बोली भागो नही तो मार डालेगे। उसकी आवाज सुनकर हम लोग घबरा कर जैसे गिरते पड़ते बेटियों को साथ लेकर भाग गये। उस समय यह समझ में नहीं आ रहा था कि कहा जा रहे है। चारो तरफ अधेरा था लाइट नहीं थी हम लोग न पीछे मुडे न उलटकर देखा भागते गाँव के आगे एक भट्टा था जो कई वर्षा से बन्द था। लोग कहते है वहा भूत है। हम लोग भागते-भागते वहाँ पहुंचे वहा गढ्डा था। हमलोग छिपकर जाकर बैठ गये हमारे साथ गाँव की और औरते भी थी। सभी वहा जाकर छिप गये वहा भी सुरक्षित नही थे रात का समय था जानवर भी काट सकते थे लेकिन पुलिस की मार के डर से बिना परवाह के हम लोग रात भर वही गुजारे जब सुबह हुआ तब वहा से हम लोग घर आये। वहा थे लेकिन चिन्ता थी कि पुलिस कही तलाशते हुए हम लोगों के पास आ जायेगी तो क्या होगा वह हमे जिन्दा नहीं छोड़गी जिस तरह से वह औरत चिल्लाते हुए आयी इतना डर था कि उस दहशत से अच्छा हम लोग यही रहे भले कुछ हो जाये उनकी मार से तो बच गये। आज जब गाँव की यह हालत देखकर सोचते हैं कि किस तरह से लोगो ने गाँव के औरतो को मारा गया है। वह बहुत ही दुख वाली बात है। गाँव की विमला जिसे इतना मारा गया कि वह डर से गाँव छोड़ कर भाग गयी है। जब हम लोग सुबह आये तो घर की हालत देखने लायक नहीं थी। उन लोगो ये सब बर्बाद कर दिया था। 6 चारपाई जिसकी हालत देखी नहीं जा रही थी। उसे देखकर यही लग रहा था कि अगर हम लोग होते तो हमे जान से हाथ धोना पढ़ता चार कुर्सी बैठने लायक नहीं रही। 6 गाय थी सब छोड़ दिया गया था जिसमें से दो बडी-बड़ी बछिया नहीं मिली हैं। सब कुछ तहस-नहस कर दिया उन लोगो ने इस घटना से पुरा गाँव बर्बाद हो गया है। मेरे पति की दुकान थी उस घटना के बाद से वह नहीं खुल रही है। जवान लड़का व भाग-भाग फिर रहा है। न खेती है न कोई और रोजगार हम लोगो का सामान भी नुकसान हुआ कमाने में भी बाधा आ गयी। उस रात के बाद से तो और डर लोगो के बीच हो गया। लोग भागे-भागे फिर रहे है। रात-दिन चिन्ता लगी रहती है। अपने आप को हम लोग असुरक्षित मान रहे है। अब भी कोई गाड़ी गाँव में आती है तो लोग किनारे हो जाते हैं सब अकेला महसूस कर रहे है। डर से कोई कही निकल नहीं रहा हैं न पहले की तरह लोग आपस में बैठ रहे है। सब दहशत में जी रहे है। हम लोग तो बर्बाद हो गये। कई साल पीछे चले गये बस यही चिन्ता है कि कब सब कुछ ठीक होगा। पहले की तरह हम लोगो की जिन्दगी में कब खुशी आयेगी।
            हम बस यही चाहते है कि हमारा परिवार फिर एक साथ हो हम लोग जिस तहर से जिन्दगी मेहनत मजदूरी कर जीवन काट रहे थे। उसी तरह वापस हो हम लोगो को सताया न जाये। पुलिस अभी गिरफ्तारी के लिये दबिश दे रही है। इससे और डर व दहशत से लोग भाग रहे है।
            हम चाहते है पुलिस वाले हमारे गाँव न आवे और न ही किसी प्रकार से और बेगुनाह को पकड़े। हम अपनी कहानी को बताकर हल्कापन महसूस कर रहा हूँ।

साक्षात्कारकर्ता - फरहद शबा खानम्                           
संघर्षरत पीडि़ता - श्यामकली

Tuesday, 29 September 2015

मुझे यह नही मालूम थी कि चोरी की गाड़ी है !

सदियों से दलित चाहे गुनहगार हो या न हो लेकिन सजा हर हाल में भुगतता वही है। वह अशिक्षित व मजदूर होता है] उसके अन्दर इतनी चालाकी व होषियारी नही रहती है। ऐसी ही घटना में फंसे एक ऐसे पीड़ित की कहानी उसी की जुबानी से सुने!

मेरा नाम अभय राज है, मेरी उम्र-26 वर्ष है मेरे पिता श्री जगत पाल है। मैं कक्षा 7 तक पढ़ा हूँ। मैं विवाहित हूँ, मेरे तीन बच्चें है, मैं बनी मजदूरी करता हूँ।
मैं ग्राम-नरसिंहपुर, थाना-घुरपुर, ब्लाक-चाका, तहसील-करछना, जनपद-इलाहाबाद का मूल निवासी हूँ। 28 मार्च, 2015 को मेरे लिए इतना बुरा होगा मैं नही जानता था। कुछ काम से मैं नैनी (इलाहाबाद) गया हुआ था, दोपहर का समय था। तभी गाँव के पंण्डित सुशील का फोन आया। उसने मुझे भडरा चैराहे पर बुलाया। मैं कोई भी होने वाली अनहोनी से अन्जान था, मैं चला गया मैंने कोई गलती नही की थी, जब मैं गया तो वहां उसके साथ छः पुलिस वाले थे, उन्हे देखकर मैं धबरा गया और सोचा कि इसके साथ यह लोग क्यो खडे़ है। पटरा बल्ली की दुकान थी, वहाँ पर जहाँ वह लोग खडे थे, वहाँ बिना कुछ पूछे कहे वह मुझे एग्रीकल्चर चौकी ले गये। उस समय मेरे घर वालों को कोई खबर नही थी। चौकी जाने पर पता चला कि गाड़ी चोरी का मामला है। जारी गाँव का दीपक पाल था, उसे भी इसी आरोप में चौकी पर रखा गया था। वहाँ जाकर मुझे सारा मामला समझ में आया। उभरी के अनवर को 2500/-- रुपये में गाड़ी दो पहिया खरीदी था। मुझे नही मालूम था कि यह गाड़ी चोरी की है। उसके बाद मैने भी 13000/--  में गाँव से ही उस गाड़ी को खरीद लिया। उसका कागज नही था। 

वह बोला बाद में हम कागज देगे हमने कागज को नहीं लिया यही गलती मुझसे हो गयी थी, अगर कागज होता तो शायद आज यह दिन नही देखना पड़ता रातभर मैं चौकी में ही था पुलिस वाले रात करीब आठ बजे मेरे छोटे भाई कन्हैया को भी पकड़कर ले आये और हम लोगो को बन्द कर दिया और दस से बारह डण्डा पुलिस वालों ने मुझे पीटा। दीपक पाल से पुलिस वालो ने पैसा लेकर छोड़ दिया जिन्होने पैसा नही दिया। वह थाने पर ही थे, सुशील को तो मैं नहीं था जानता लेकिन हम लोग तो सिर्फ खरीदने के गुनहगार थे। रातभर मैं फिक्र के मारे सो नही पाया। मैं अनुसूचित जाति का जरुर हूँ। लेकिन चोरी नहीं कर सकता। गाँव में मेरी इज्जत है, मेरे पिता एक अच्छे पोस्ट पर सरकारी विभाग में थे, अब वह रिटायर हो गये है। रात भर मैं यही सब सोचता रहा कि मेरा बड़ा भाई कृष्ण चन्द्र मुझसे मिलने आया था। उस समय मुझे बहुत दुख हुआ और हमें शर्म भी आयी कि आज हम लोगों की छोटी सी गलती के कारण मेरे घर वाले परेशान है। उन्हें लोगों के बीच हमको शर्मिन्दा होना पड़ रहा है। लेकिन अब क्या कर सकता। भईया से ही पता चला कि इस घटना से मेरे पिता बहुत दुखी है। दुसरे दिन हमें नैनी थाना भेज दिया गया। वहाँ रातभर रखा, वहाँ से तीसरे दिन चाका ब्लाक से मेडिकल कराकर जेल भेज दिया गया।  सर्किल न0 6 में मुझे रखा गया 120 से 125 आदमी उस सर्किल में थे, वहाँ मुझे फुल तोड़कर माला बनाने का काम कराया जाता था। एक महिना 8 दिन तक मैं जेल में था। जब तक था अजीब सी उलझन रहती थी। दिन रात मै यही सोचता कि बाहर जाकर किसको क्या मुँह दिखाऊगा। पिताजी से कैसे नजर मिला पाऊंगा यही सब सोचता रहता था। हमेशा परिवार की चिन्ता लगी रहती थी। मेरी पत्नी मेरे बारे में क्या सोचते होगे। मेरे बच्चों के ऊपर इसका क्या असर पडे़गा। गाँव वाले भी तरह-तरह की बात कर रहे होगें। दिन रात इसी में जुझता रहता था। मेरा भाई रामतीरथ हम लोगों से मिलने जाते थे, हमको उस समय बहुत शर्मिन्दगी महसुस हो रही थी।
उभारी के अनवर की गाड़ी पकड़े जाने के बाद से ही पुलिस वाले इस मामले की तफ्तीश करने लगे गाँव का ही सुशील उसी नाते वह गाड़ी खरीदने व बेचने का काम करता था। इसलिए हम लोग भी उसे गाड़ी खरीदकर बेच दिये। हमें यह नही मालूम था कि चोरी का है। विश्वास के कारण यह सब हुआ। जेल में हमें कभी सुबह में चना, गुड़ और कभी पाव रोटी नाश्ते में मिलता था। दोपहर को दाल चावल और रोटी मिलती थी। खाना बिल्कुल अच्छा नही लगता था दिल अजीब तरह से धबराता था। मैं यही सोचता कि इससे अच्छा तो मैं बाहर ही था। आठ-नौ साल जबलपुर में बनी मजदूरी करता था। वही रहा होता तो आज यह दिन नही देखना पड़ता।

      जब से जेल से छुटकर आया हूँ पिता जी से मिलने की हिम्मत नही हुई है। किस मुँह से जाऊ मेरा छोटा भाई कन्हैया जो मेरे साथ जेल में था उसकी शादी वहां से आने के बाद हुई जो खुशी होनी चाहिए थी वह नही हुई। बेमन से सारी रस्में अदा की गयी। यह मेरी जिन्दगी का सबसे बड़ा दाग है। इससे मेरे पिता जी और मेरा पुरा परिवार बहुत शर्मिन्दगी महसुस कर रहा हूँ। जब से आया हूँ कही आने-जाने का मन नही करता है। पहले की तरह कुछ भी नही है। बस यही हमेशा लगता है कि लोग हमारे बारे में क्या सोचते होगें। त्योहार शादी विवाह आना-जाना सब पहले जैसा होता था कुछ भी नही हो पा रहा है। रात दिन चिन्ता लगी रहती है। रातो को नींद नही आती है। मुकदमा कायम हो गया है। जमानत पर छुटा हूँ। मैं सिर्फ खरीदकर बेचने का गुनेहगार हूँ। मैंने कोई चोरी नही की है। अगर मुझे मालूम होता तो मैं कभी ऐसा नही करता।
       मैं चाहता हूँ कि मुझसे जो अन्जाने में गलती हुई है। उससे मेरे परिवार को शर्मिन्दगी हुई है। मैं मांफी मांगना चाहता हूँ। न्यायालय जो भी न्याय मुझे दे वह मुझे कबुल होगा। आइन्दा फिर मैं कभी इतनी बड़ी गलती नही करुंगा।


  साक्षाकारकर्ता -(फरहत शबा खानम् व मनोज साहू                        
  संघर्षरत पीड़ित - अभय राज