Monday, 27 April 2015

मेरे पति के हत्यारों ने कहा पुलिस प्रशासन को जेब में रखता हूँ!

         मै सुनीता मसोमात उम्र 34 वर्ष पति स्व0 कैलाश यादव ग्राम-घरवरियाबर] पोस्ट-बेहराडीह] थाना-डोमचांच, जिला-कोडरमा] झारखण्ड की मूल निवासी हूँ।
मेरी घटना यह है कि मेरे पति लकडी मिल में काम करते थे और जो कमाई होता था, उसी से मेरा घर चलता था। इसी तरह समय बीत रहा था। मेरे पति सीधे-साधे इन्सान थे और पूरे परिवार व घर का खर्च चला रहे थे। इसी तरह समय के साथ-साथ मैं तीन बच्चों की माँ बन गयी। मेरे पास दो लड़का एक लड़की है। मेरी बेटी का शादी हो गया और पिछल एक साल से मेरे पति कैलाश यादव ग्राम केलपुर] थाना-धनवार में आरा मील में लकडी का काम कर रहे थे। वहा लकडी का मिल है] वो लोग सारा काम रात को ही करवाता है क्यों कि वो आरा मिल अवैध रुप से चलाते थे। इस बात की जानकारी मेरे पति को नहीं थी। मेरे पति को यह कह कर काम पर लगवाये कि रोज का मजदूरी तुमको 400 रुपये देगें। लेकिन वो आधा पैसा देते थे। आधा पैसा रख लेते थे कि बाद में ले लेना और जब भी मेरे पति पैसा मागते तो टाल मटोल कर देते थे। मेरे पति रक्षाबंधन में घर आये थे और दिनांक 12 अगस्त] 2014 को वापस काम पर चले गये।
दिनांक 13 अगस्त] 2014 को वो रात काम कर रहे थे तभी उन पर मोटा व बडा लकडी गिर गया। इस बात की जानकारी हमलोगों को तब मिला जब दिनांक 14 अगस्त] 2014 को वो मेरे पति को एक आटो में एक आदमी के साथ गम्भीर अवस्था में दिन के 12%00 बजे भेज दिया। उस समय बहुत जोर से बारिश हो रही थी। हमलोग जब उनको अचानक ऐसी हालत में देखे उन्होने हमको सारी बात बताई हमने कहा कि वो इलाज क्यों नही करवाये, तो उन्होनें कहा कि घर इस लिए भेज दिया कि ज्यादा चोट है कुछ आराम कर लेना वो हमसे और कुछ कहना चाह रहे थे पर कह नहीं पा रहे थे, हम तुरन्त ग्लूकोज मंगवा कर उनको पिलाने लगे लेकिन वो नहीं पी पाये। हम लोग उनको तुरन्त डाक्टर के पास ले कर निकल गये लेकिन उनका रास्ते में मृत्यु हो गयी। उस समय लग रहा था मेरे पैर तले जमीन खिसक गई हो। लग रहा था कि हम मर जायेगें। हमको होश नहीं था मेरा पुरा बदन बेजान हो गया और मेरा सब कुछ खत्म हो गया था। अब इस दुनिया में मेरे लिए कुछ भी नहीं बचा था। फिर हमलोग उन्हें घर ले आये उनका दाह संस्कार ग्रामिणों के सहयोग से कर दिये। हम उस समय उनके साथ ही जलने जा रहे। लेकिन लोगों ने हमे पकड लिया हमे जलने नहीं दिया। हमको समझाया कि तुम्हारे छोटे-छोटे बच्चे है उनको कौन देखेगा। फिर हम भी हिम्मत किये और लकडी मील के मालिक के पास गये थे। मूरत यादव पिता स्व0 बंधन यादव ग्राम-केलपुर] पोस्ट-अरखागो] थाना-घनवार] जिला-गिरडीह के निवासी और दुसरा ब्रम्हदेव यादव पिता स्व0 खुभो महतो ग्राम-तरोनिया पोस्ट-निमाडीह] थाना-घनवार] जिला-गिरिडीह और तीसरा मुजाहिद अंसारी पिता महरुम सकुर मिया] ग्राम व पोस्ट-निमाडीह] थाना-घनवार] भी आया हमलोग भी वहा गए हमलोग बोले की हमलोगे थाना जा रहे है तो वो लोग एक बोन्ड पेपर बनाया और उसमें साईन किया कि आप लोग थाने मत जाइये हमलोग आपके भविष्य के लिए उचित मुआवजा देगे और फिर उसी दिन 10 हजार रुपये दिया और बोला की 20 हजार उस दिन देगे जिस दिन सब लोग एक साथ होगे। लेकिन आज तक उन लोगो ने पैसा नहीं दिया और जब मेरे जेठ फोन किये तो उन लोग मना कर दिया की हमलोग पैसा नहीं देगे जो करना है कर लेना। हमको बोले कि तुमको कहा जाना है जाओ हम देख लेगे एस0 पी0] डी0 एस0 पी0 सब को हम अपने जेब में रखते है। हम कोई पैसा नहीं देगे और किसी भी तरह का मुआवजा भी नहीं देगें।
यह बात सुनकर हमे लगा कि अब मै अपने बच्चों को कैसे पालूगी। वो लकडी मील जो चलाता था उसमें रात में काम करवाता था। ये बात मेरे पति हमें बताते थे। तब मै बोली कि सरकार से छुपकर लकडी कटवाता है और रात में चिरवाता है सो सब बोल देगे पर वो नही डरा और हमें धमकाते हुए कहा कि जाओ जो करना है कर लेना हम सबको खरीद लेगे। हम अपना और अपने बच्चों का कैसे पालन पोषण करेगे। मेरा दोनो बच्चा हमेशा पापा को याद करता है। हम उनका चेहरा देख कर टुट जाते है। मेरा दिल रो पड़ा और मै फिर अपने घर वापस आ गई। कई लोग बोले कि केस कर दो पर मेरे पास घर में खाने के पैसा नहीं है तो केस कैसे करते है। उस दिन से आपने ही घर में भूखी-प्यासी रहती हॅू। किससे कर्ज लू। कोई कुछ काम करने को कहता है तो कर देती हूW और जो पैसा मिलता है। उसी से अनाज ला कर खाती हॅू।
        मै चाहती हॅू कि लकड़ी मील मालिको के साथ कानूनी कार्यवाही हो और उसे सजा मिले और हमें न्याय मिले।

 साक्षात्कारकर्ता - ओंकार विश्वकर्मा                         
 संघर्षरत पीड़िता- सुनीता मसोमात


Friday, 24 April 2015

‘’आज भी समाज में गरीब बेसहारा लाचार लोगों के ऊपर दबंग लोग अपना अधिकार करके उनका हक छिनते है और पुलिस वाले न्याय की कठपुतली बनकर तमासा देखते है’’

मेरा नाम बविता देवी पत्नी राजपति निषाद उम्र 30 साल है। निवासी ग्राम-बदलपुर(सोनगाँव) तहसील व कोतवाली-अकबरपुर जनपद-अम्बेडकरनगर की रहने वाली हॅ। मैं जाति की केवट हॅू। मेरे परिवार मे पति राजपति व बच्चे व ननद है। मेरे पति खेती बाड़ी का काम करते जिससे परिवार का भरण-पोषण होता हैं।
यह घटना 14 मई 2012 को दबंगो ने जबरजस्ती मेरे जमीन पर दिवाल उठा लिया। जब मैं अपने परिवार के साथ रोकने गयी और पूछी भाई जी ये जमीन मेरी है तो वे हम लोगों को मारने-पीटने लगे। गन्दी-गन्दी गालिया देने लगे और कहने लगे यह सब मेरा है तुम्हारी कुछ नहीं है जबकि 50 सालो से उस जमीन पर रास्ता बना है। इसके पूर्व सन् 2009 को थानाध्यक्ष द्वारा जमीन की जाॅच कराकर रास्ता खुलवाया गया था। लेकिन मुझे पता नहीं था किसी दिन इस रास्ते का विवाद बहुत बड़ा काल बन जायेगी। उस वक्त अपनी रियाईसी जमीन मिल गई है। सब ठीक-ठाक चलती रही लेकिन मई 2012 को यह विवाद दोबारा दबंग दिनेश, राकेश सहित दर्जनो लोगो ने मेरे घर पर हल्ला बोल दिया उस वक्त घर पर मेरे पति भी नहीं थे वह बाजार गये थे। उस वक्त मै हैरान रह गयी। आखिर यह सब क्यो हो रहा है जबकि यह जमीन मेरी है दबंग गन्दी-गन्दी गालिया दे रहे थे जब मना किया। कि क्यो गाली दे रहे हो तो मारने-पीटने लगे। मेरा पूरा परिवार दर्द से कहर रहा था। मेरे शरीर के रोगटे गटे खडे़ हो गये। मेरी समझ में कुछ नहीं आ रहा था। हम लोग रोते गिड़गिड़ाते रहे। उस वक्त मेरी कोई सुनने वाला नहीं था। मेरी ननद व बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल था। उस वक्त मैं दंग रह गयी क्या जमाना आ गया है। जिसकी लाठी उसी की भैंस मेरे पति को जब पता चला तो भागते-भागते आये। 
उस वक्त मुझे सिर्फ रूलाई आ रही थी। मेरे पति बौखला गये थे। मेरे ननद की कान की बाली छीन ली। उस वक्त गाँव मे चारो तरफ सन्नाटा छा गया था। मेरे पति व मै थाने गयी तो पुलिस सिर्फ अश्वासन देकर उल्टे पाव वापस भगा दिया। उस दिन भूख-प्यास सब खत्म हो गयी। मेरे बच्चों का रो-रो कर बुरा हाल था। जब पुलिस नहीं आयी तो मुझे लगा कि पुलिस दबंगो के साथ मिली है। मेरे परिवार वालों को काफी चोट आयी। मेडिकल भी नहीं हुआ। उस वक्त मैं पूरे परिवार के साथ इलाज करवा रही थी। बार-बार कानून पर रूलाई आ रही थी। क्या कानून है, जहा न्याय की उम्मीद न हो। उस दिन रात भर नींद नही आयी सिर्फ रात भर करवटे बदलती रही। बार-बार मेरे अन्दर डर भय बनी हुई थी कि कहीं दबंग आकर फिर न मारे-पीटे बहुत घबराहट हो रही थी। मै आज भी पुलिस प्रशासन से न्याय की भीख माग रही हूँ। बस एक ही उम्मीद हो सकता है मुझे न्याय मिल जाय। जब तक मुझे न्याय नहीं मिल जाती। उसके लिए मैं अपनी संघर्ष जारी रखॅूगी।
मैं अपनी पीड़ा को बताकर काफी हल्का पन महसूस कर रही हूँ। मुझे उम्मीद है कि आज नहीं तो कल मुझे जरूर न्याय मिलेगा।

साक्षात्कारकर्ता - मनोज कुमार सिंह                               
संघर्षरत पीड़िता- बविता देवी


                                         

दबंग द्वारा गरीब को प्रताड़ित व मारा-पिटा करना!

मेरा नाम राम प्रताप गौतम उम्र 53 वर्ष है। मेरे पिताजी का सीताराम गौतम है। मेरे पास 6 लड़का है। अमरजीत गौतम, उम्र 28 इंद्रजीत उम्र 26 वर्ष रणधीष 25 वर्ष, धनंजय 23 वर्ष, जनाधन 20 वर्ष, रोहित 18 वर्ष है। 3 पतोहू है और 6 पोता, पोती है हम सभी परिवार साथ में है। ग्राम-ताजपुर, पोस्ट-रामपुर सकरवी, थाना-वेवाना और जिला-अम्बेडकरनगर हैं। मै लगभग 30 वर्ष से अपने ससुराल में ही रह गया हूँ। मेरा कुछ पैतृत घर/जमीन कटघर मुशा में भी है। मेरा 6 लड़का में 3 लड़का ताजपुर में मेरे साथ रहता है और लड़का कटघर मुशा में रहता है। मै अनुसूचित जाति के चमार हूँ।
दिनांक 16 मई, 2014 को मेरा दोनो लड़का धनंजय एवं रणधीश अपने खेत में गेहू बो रहा था। तभी ताजपुर निवासी ठाकुर, मनोज सिंह एवं ठाकुर विनोद सिंह और ठाकुर राकेश सिंह ने 40-50 गाय, भैस लेकर आया और खेत में हाक दिया जिससे खेत में गेहू बिखेर दिया जिस पर मेरा दोनो लड़का गाय, भैस को खेत से हटाने के लिए कहा जिसपर ठाकुर ने गाली ग्लोज करने लगा जिसपर मेरा दोनो लड़का भी गाली दे दिया फिर ठाकुर के बच्ची ने देकर और गया और अपने परिवार से कुछ लोग को बुला लाया वे सभी लोग लाठी डंडे लेकर दौड़तें हुए आया जिसे देखकर मेरा बेटा पतोहू भागने लगा पर रंधीश को उन लोगो ने पकड़ और लात घूसे, चप्पल, जूता एवं लाठा से मार पिट करने लगे मारते-मारते वाया पैड तोड़ दिया और गाली दिया। आज के बाद अगर बोला तो मारते-मारते मार डालेगे। मारने के क्रम में मनोज सिंह, पिता प्रमोद सिंह, विनोद सिंह, पिता मुलूकराज सिंह, राकेश सिंह पिता प्रमोद सिंह, सामिल थे। पुरानी रंजीश को लेकर हम औरं मेरा लड़का अमरजीत थाने गये।
जहा पर ठाकुर लोग थाने जाकर पहले ही रिपोर्ट कर दिया था। मेरे थाना जाने के बाद हमने दरोगा को सभी बात बताई दरोगा सिर्फ लिख लिया कुछ बोला नहीं उसके बाद हम घर चले आये और दूसरे दिन सी0ओ0 का पेशकार मेरे घर पर जाच करने के लिए आया और टुटे पैर देखा और जहा मार-पिट हुआ उस खेत पर गया और बोला की लड़ाई झगड़ा मत करना। कानून हाथ को नही लेना और उसके बाद अभी तक कोई कुछ नहीं किया फिर हमने 21 अप्रैल, 2014 को रंधीश के लेकर अस्पताल जनपद अम्बेडकर नगर इलाज के लिए ले गये। जहा उसका एक्स-रे हुआ और पैर टूटने का रिपोर्ट आया और बाया पैर में व एक महीने के लिए बेन्डेज किया गया और ये मार-पिट की घटना ठाकुर लोग बहुत दिन से करते आ रहे है। हमारे ससुर को पहले भी मार-पीट कर चुका है।
      घटना से हम लोग बहुत डरे हुए हैं। गाँव मे हम लोग के जाति में 40-50 में घर है पर संगठन नहीं है। वो लोग दबंग है। हम कई बार ग्राम प्रधान को बोले थे। जिसपर ग्राम प्रधान बोले की हम समझा देगे और वो समझाये भी थे पर वे लोग किसी का बात नहीं मानता है। ठाकुर मनोज रोज गाय भैस को लेकर हमारे घर के बगल से जात है और खेत मे हाक देते है और कहता है कि जो करना है कर लेना अगर कुछ करते है तो वो लोग पैसे वाले है। जमीन्दार है वो हमें कुछ भी कर सकते है। हमे बर्वाद कर सकता है। हम डरे हुए है और वो लोग बार-बार धमकी देते है कि अगर हम जेल जायेगे तो फिर घर में घूस कर सभी को मारेगे हम लोग काफी डरे हुए है। की कब क्या होगा।
       कृपया कर के आप लोग हमारी मदद कर ताकि हमारे परिवार लोग ठीक से जी सके।

साक्षात्कारकर्ता&मनोज dqekj सिंह                              
संघर्षरत पीड़ित& राम प्रताप गौतम



                              

दवंग ने अपनी दबंगई के बल पर एक महिला का आवास न बनने देना व गाँव से भगा देने की धमकी देना!

मेरा नाम बदामी देवी उम्र-35 वर्ष है, मेरे पति का नाम राम सुभावन है। मैं मुसहर जाति की महिला हूँ। मैं ग्राम-चपरा, थाना-महरुआ, तहसील-भीटी, जिला-अम्बेडकरनगर की रहने वाली हूँ। मेरे तीन लड़के व तीन लड़कियाँ है। मेरे पति बस्ती जिले में एक ईट भट्ठे पर कार्य करते है।
मेरी शादी 13 वर्ष की आयु में ही हो गयी। शादी के बाद जब मैं अपने ससुराल पहूँची तो देखा कि दो छप्पर नुमा मकान में सारा परिवार अपना जीवन बिता रहा था और मेरे ससुर गाँव के ही देवी सिंह जो पूरे गाँव में अपने सरकशी और दबंगई के लिए मसहूर है। उनके यहाँ घरेलू नौकर है, शादी के दो दिन बाद ही गाँव के ठाकुर साहब घर आये और बोले कि अब तुम्हारी बहु आ गयी है और वह अब हमारे यहाँ कार्य करेगी यह सुनकर मैं सन्न रह गयी। सारे सपने सारे अरमान सब पर पानी फिर गया, ठाकुर साहब के जाने के बाद मैंने ससुर जी हिम्मत बांध कर कहा बाबू जी मुझे आये दो दिन भी नही हुआ मेरे हाथों कि मेहदी भी नही छुटी मै मजदूरी करने नही जाऊॅगी तो ससुर जी ने कहा कि बहू मैं मजबूर हूँ अगर काम करने नही जाओगी तो ठाकुर साहब हम सब को मार पीट कर गाँव से निकाल देंगे फिर मजबूर होकर मैं ठाकुर साहब के यहाँ काम करने गयी वहाँ मुझे घर की साफ-सफाई वर्तन दोना गोबर फेकना चारा काटना, पशुओं की देख-भाल करना पड़ रहा है।
इसके बदले में ठाकुर साहब मुझे कोटे पर राशन लेने के लिए पैसे देते थे, इस तरह घास फूस की बनी छप्पर में जीवन व्यतीत करते 20 वर्ष बीत गये इसी बीच जब सुना कि मेरा इंदिरा आवास आया है तो मन में एक आस जगा कि चलो अपना भी एक छत का आशीयाना होगा और आराम से रात गुजरेगी, बैक में खाता खुला आवास का पहला किस्त आया तो ठाकुर साहब और प्रधान जी के साथ रकम निकालने के लिए बैंक गयी जहाँ पैसा निकालते ही दोनों लोगों ने कहा पैसा पास बुक दोनों हमें दे दो, ईट और सामान गिराना है। कुछ दिन बाद दो ट्राली ईट गिरा लेकिन ठाकुर साहब आये और कहा यह जमीन हमारा है, यहाँ मकान नही बनेगा। मैं बार-बार मिन्नत करती रही पैर पर गिर कर मैं और मेरे परिवार के लोग गिड़ गिड़ाते रहे लेकिन ठाकुर साहब ने कहा ज्यादा बोलोगे तो गाँव से भगा दूँगा। अब मेरी समझ में नही आ रहा था कि क्या करुँ आवास का पैसा भी वापस चला गया और छत का सपना भी टूट कर विखर गया।
                हम चाहते है कि उनके खिलाफ कानूनी कार्यवाही हो और हमें न्याय मिले।


       साक्षात्कारकर्ता -- मनोज कुमार सिंह                                     
 संघर्षरत पीडिता - बदामी देवी

Tuesday, 21 April 2015

दबंग द्वारा गरीब अनुसूचित जाति के लोगो को प्रताड़ित किये जाना !

मेरा नाम राजकुमार पुत्र स्व0 रमाकान्त उम्र 29 वर्ष ग्राम-तियरा (मानपुर) पोस्ट-विच्छी थाना-राबर्ट्सगंज, जिला-सोनभद्र का निवासी हॅू। मै गरीब अनुसूचित जाति (चमार) का हूँ। मै अपने परिवार का पालन पोषण मजदूरी करके करता हूँ। मेरे 2 लड़के तथा 2 लडकियाँ है।
घटना जुलाई 2012 की है। जब मैं अपनी जमीन जोतने से मना करने गया तो रमाशंकर रमेश यादव, मुनीब यादव, अर्जून यादव, पुत्र स्व0 मंगरू यादव जो कि मेरे गाँव व घर के बगल के ही है। उल्टा मुझे तथा मेरी माँ-बहन को भद्दी-भद्दी गालिया देने लगे तथा लाठी व कुल्हाड़ी लेकर आ गये। और गाली देते हुए कहने लगे कि तुम जब छोटे थे तब हम लोगो ने क्या किया था तुमको मालूम नहीं हैं। तुम्हारे बाप को और तुम्हारे दादा बैजू को ऐसी मार मारे कि हाथ टुकडे-टुकडे हो गये। हम लोगो पर एसी/एसटी कानून कुछ नहीं हुआ जेल जाना तो आसान है तुम्हारा धारा कानून कुछ नही करेगा। हम लोगो के मार से तुम्हारे दादा बाप दोनो मर गये। जिसे हम लोग मारते है। वह ज्यादा दिन तक नही रह सकता। अब तुम इस जमीन को हक जमाने आये हो तो तुम्हारा भी वही हश्र होगा जो तम्हारे बाप दादा का हुआ था।
       इस जमीन का चक्कर छोड़ दो हम लोग इसे लूट लिए तो लूट लिए। मरना है तो फिर वोलो तम्हारा बाप भी था कि बडे से बडे अधिकारी और थाना कोतवाली सभी को प्रार्थना पत्र देते-देते मर गया कुछ नही कर सका। अब तो तुम्हारा भी इलाज हम लोग कर देगे। मै जब छोटा था तब अपने बाप और दादा के साथ हुई घटना को देखा था फिर मेरे दिमाग पर वह दिन याद आया और मै डर के मारे कापने लगा। फिर मेरी जमीन सरहंगो गुण्डो ने जान से मारने की धमकी देते हुए मेरी जमीन जोतने लगे। मैने पूर्व में जिलाधिकारी महोदय को भी प्रार्थना पत्र दिया था जाँच में लेखपाल आये। और मुझे अपने क्वाटर पर बुलाए और बोले कि यहाँ सभी मुख्य पदो पर यादव विरादरी के अधिकारी है। पुलिस यादव की बात ही करेगी।  और सपा का शासन है। मैं कुछ करने में असमर्थ हूँ। क्योकि मैं इसका इल्जाम बहुत भोग चुका हूँ । अब नहीं भोगना चाहता हूँ । मेरे साथ मेरी विधवा माँ व नावालिक एक भाई व बहन है। दबंग बहुत प्रभावशाली वाले हैं। हम दलित गरीब की सुनवाई कही होती नहीं है आये दिन दबंग गाली गुप्ता देते रहते है। तथा जमीन को जोता बोया करते रहते हैं।
      मेरे जमीन का नम्बर 128 ख रकबा 4 विश्आ है। जिसे मेरे पिता रमाकान्त ने रामधारी यादव से अपने गुजर बसर के लिए खरीदा था जब तक रामधारी जीवित था तब तक तो मंगरू व उनके लड़के ने कोई परेशानी नहीं किया। फिर जब रामधारी मर गये तो मंगरू व उनके लड़के लाठी-डन्डे व गुण्डई से जमीन कब्जा कर हम लोगो को जाति सूचक शब्दो का प्रयोग करते है। और कहते है कि  तुम्हारी कही सुनवाई नहीं होगी। इतना ही नहीं कब्जा भी किये तथा उल्टा उपरोक्त आराजी पर काटवंदी का मुकदमा न्यायालय तहसीलदार मजिस्टेªट चल रहा है। जब कि वर्तमान में मुकदमा की तारिख देखते है और गुहार लगाते रहे मगर कोई सुनवाई नही हुई। बाद में मेरे पिता की मृत्यु हो गयी व दबंग मंगरू यादव भी मृत्यु हो चुके है। पुनः मुकदमा राजकुमार व अवधेश कुमार (नावालिक) स्व0 सुमित्रा देवी के नाम से माननीय उपजिलाधिकारी के यहाँ चल रहा है। जब कि मैं मुकदमा लड़ने में असमर्थ हूँ मै यही सोचता हूँ कि भगवान हम गरीबो दलितो का जन्म इस संसार में क्यो दिया। जब यह दुनिया गुण्डो व दबंगो के लिए है। जब न्यायालय और अधिकारी गुण्डो व दबंगो के प्रभाव के आगे नरवस है। मुझे तो लगता है। कि मेरी जमीन अब वापस मुझे नहीं मिल पायेगी। क्योकि मेरे पिता व दादा जैसे मुझे भी हाथ पैर तुडवाना पडेगा और मृत्यु का भोग भोगना पडे़गा ऐसा लगता है। कानून भी दबंगो के लिए है। गरीबो दलितो के लिए तो केवल दिखावा हैं
अपनी कहानी बताने में मुझे बहुत पीड़ा महसूस हो रहा है फिर भी कहानी बता कर कुछ हल्कापन समसूस कर रहा हूँ और हम चाहते है कि हमें न्याय मिले और दबंग लोगो को सजा।
  साक्षात्कारकर्ता                                    संघर्षरत पीड़ित
 श्याम जी$पिन्टू गुप्ता)                              (राजकुमार)